महाराष्ट्र के बीड जिले के जंगलों में करीब 100 साल बाद बाघ की मौजूदगी दर्ज होने के बाद अब उसकी गतिविधियां लगातार सामने आ रही हैं। यवतमाल जिले के टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य में जन्मा यह बाघ कई जिलों का सफर तय कर बीड पहुंचा है। दो महीने से कुछ अधिक समय के भीतर दूसरी बार इसकी तस्वीर कैमरा ट्रैप में कैद हुई है। ताजा तस्वीर 2 नवंबर को आष्टी वन क्षेत्र के भुरेवाड़ी गांव के पास लगे कैमरे में रिकॉर्ड हुई।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस बाघ का जन्म वर्ष 2022 में यवतमाल के टिपेश्वर अभयारण्य में बाघिन टी-22 से हुआ था। बड़े होने के बाद यह अपने मूल क्षेत्र से निकलकर नए इलाके की तलाश में आगे बढ़ा। इस दौरान इसने चंद्रपुर, धाराशिव, लातूर और अहिल्यानगर जिलों से होते हुए महाराष्ट्र के अलग-अलग वन क्षेत्रों में आवाजाही की। इसकी मौजूदगी सोलापुर जिले की बार्शी तहसील के कारी इलाके में भी दर्ज की गई थी। इसके बाद यह बीड के पाटोदा क्षेत्र में पहुंचा।
वन अधिकारियों के अनुसार, अक्टूबर के मध्य में बाघ ने पाटोदा तहसील के सगलेवाड़ी और जरेवाड़ी में दो मवेशियों का शिकार किया था। बाद में नायगांव मयूर अभयारण्य के जलस्रोत पर पानी पीते हुए भी इसकी तस्वीर सामने आई।
बाघ की लगातार मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने आसपास के गांवों के किसानों और ग्रामीणों के लिए सतर्कता संबंधी सलाह जारी की है। लोगों से जंगल के किनारे और घने वन क्षेत्रों में अकेले जाने से बचने तथा बाघ दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देने की अपील की गई है। विभाग कैमरा ट्रैप के जरिए उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है।
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