सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल: केरल हाईकोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में धरना, भूख हड़ताल और सत्याग्रह जैसी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि शिक्षण संस्थान शिक्षा प्रदान करने के लिए हैं, राजनीति करने के लिए नहीं। ऐसे संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने वाले विद्यार्थियों को निष्कासित या संस्थान से निलंबित किया जा सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी 3 नवंबर को श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कालडी के 16 निलंबित विद्यार्थियों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की।
न्यायमूर्ति अनिल के. नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्ण एस की खंडपीठ ने विश्वविद्यालय की अपील स्वीकार करते हुए एकल पीठ के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें निलंबित विद्यार्थियों को 4 नवंबर से शुरू होने वाली सेमेस्टर परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने के लिए विश्वविद्यालय के निर्धारित नियमों, उपस्थिति और अन्य शैक्षणिक योग्यताओं को पूरा करना जरूरी है।
क्या है पूरा मामला? यह विवाद 13 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का आरोप है कि प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने कुलपति सीजा थॉमस का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया और बाद में उनके साथ दुर्व्यवहार किया। विद्यार्थियों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनका प्रदर्शन विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग की समस्याओं को उजागर करने के लिए आयोजित एक नुक्कड़ नाटक का हिस्सा था। इसके बाद 1 सितंबर को 16 विद्यार्थियों को निलंबित कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई। अदालत ने अपने फैसले में 2017 के एक पुराने निर्णय का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि शैक्षणिक संस्थानों में धरना और भूख हड़ताल जैसी गतिविधियों में शामिल विद्यार्थियों पर निष्कासन की कार्रवाई हो सकती है।हालांकि, खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस अपील में की गई टिप्पणियां मुख्य याचिका के अंतिम निपटारे का फैसला नहीं हैं। विद्यार्थियों की अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ा मामला अभी लंबित है।
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