सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : तमिलनाडु में राज्य के 52 प्रमुख मंदिरों में स्मार्टफोन इस्तेमाल पर नई पाबंदियां लागू की गई हैं। ये नियम 1 सितंबर, 2026 से प्रभावी होंगे। नई व्यवस्था के तहत कैमरा-युक्त स्मार्टफोन लेकर आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में प्रवेश से पहले अपने फोन निर्धारित काउंटरों पर जमा कराने होंगे। बिना कैमरे वाले साधारण मोबाइल फोन की अनुमति रहेगी।
यह फैसला हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग ने मद्रास हाई कोर्ट के पहले के निर्देशों के अनुरूप लागू किया है। पाबंदियों का उद्देश्य मंदिरों की पवित्रता और शांत वातावरण बनाए रखना तथा अनधिकृत फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, सेल्फी और सोशल-मीडिया रील जैसी गतिविधियों को रोकना है।
स्मार्टफोन जमा कराने वाले श्रद्धालुओं से भाग लेने वाले मंदिरों में प्रति डिवाइस ₹5 शुल्क लिया जा सकता है। फोन जमा करने पर उन्हें पावती पर्ची या टोकन दिया जाएगा, जिसे दर्शन के बाद फोन वापस लेते समय दिखाना होगा। कुछ मंदिरों में सुरक्षित रखरखाव के लिए श्रद्धालु की तस्वीर, मोबाइल मॉडल और फोन नंबर जैसी जानकारियां भी दर्ज की जा रही हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ₹5 शुल्क राजस्व कमाने के लिए नहीं, बल्कि फोन-जमा काउंटरों से जुड़े संचालन खर्च – कर्मचारियों, लॉकर और संबंधित ढांचे – को पूरा करने के लिए है। हालांकि अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अलग-अलग मंदिरों की परिस्थितियों और जन प्रतिक्रिया के आधार पर यह शुल्क माफ भी किया जा सकता है।
कुछ श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए नियमों में संशोधन भी किया गया है। गर्भवती महिलाओं, शिशु साथ लेकर आने वालों, बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों को स्मार्टफोन प्रतिबंध से छूट दी जा सकती है। अधिक भीड़ वाले बड़े त्योहारों के दिनों में श्रद्धालुओं को फोन जमा कराए बिना अपने पास रखने की अनुमति भी दी जा सकती है।
धार्मिक परिसरों के भीतर फोटोग्राफी और सोशल-मीडिया सामग्री के लिए स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंता के बाद यह व्यवस्था शुरू की गई है। मंदिर प्रशासन को स्पष्ट सूचना-पट लगाने और पर्याप्त इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नई प्रणाली से श्रद्धालुओं को अनावश्यक असुविधा या लंबी कतारों का सामना न करना पड़े।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को शांत और आध्यात्मिक रूप से केंद्रित वातावरण में दर्शन का अनुभव देना है, साथ ही मंदिरों की धार्मिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत की रक्षा करना है।
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