सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दिल्ली SIR में वोटरों का उत्साह, दो दिन में 5.34 लाख दावे-आपत्तियांनई दिल्ली: दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत मतदाता सूची को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। मसौदा मतदाता सूची जारी होने के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया के शुरुआती दो दिनों में ही 5,34,826 आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा 1 सितंबर तक का है।
नाम जुड़वाने के लिए 2.18 लाख आवेदनदिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 के 2,18,139 आवेदन प्राप्त हुए हैं। वहीं, मतदाता सूची में दर्ज नाम हटाने को लेकर फॉर्म-7 के 51,522 आवेदन आए हैं।
इसके अलावा पते या अन्य विवरण में बदलाव के लिए फॉर्म-8 के 2,63,801 आवेदन मिले हैं। फॉर्म-6ए के तहत भी 1,364 आवेदन दर्ज किए गए हैं।पश्चिमी दिल्ली सबसे आगेनाम जोड़ने के मामलों में पश्चिमी दिल्ली सबसे आगे रही। यहां फॉर्म-6 के तहत 29,510 आवेदन आए। इसके बाद दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में 25,446 और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 25,010 आवेदन दर्ज किए गए।
वहीं, नाम हटाने से जुड़ी आपत्तियों में दक्षिण-पूर्वी दिल्ली सबसे आगे रही, जहां फॉर्म-7 के तहत 14,663 आवेदन मिले।ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 47.5 लाख नाम बाहरदिल्ली में 31 अगस्त को SIR के बाद मसौदा मतदाता सूची जारी की गई थी। इसमें करीब 47.5 लाख नाम मौजूदा मतदाता सूची से बाहर रह गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है जिन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित जैसी श्रेणियों में रखा गया है।
मसौदा सूची से बाहर हुए पात्र मतदाताओं के पास अपना नाम शामिल कराने के लिए दावा दाखिल करने का अवसर है। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है। 33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस की संभावनानिर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, मसौदा सूची में शामिल ऐसे मतदाताओं को भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिनके विवरण में विसंगतियां मिली हैं या जिनकी जानकारी पुराने रिकॉर्ड से लिंक नहीं हो पाई है। करीब 33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस मिलने की संभावना बताई गई है।
SIR की प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। ऐसे में दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया मतदाताओं को अपने रिकॉर्ड की जांच कराने और किसी त्रुटि को सुधारने का अवसर देती है।
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