सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : असम की राजनीति में कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाते हुए अखिल गोगोई के नेतृत्व वाली राइजर दल (Raijor Dal) से अपना राजनीतिक गठबंधन खत्म कर दिया है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) की ओर से जारी संगठनात्मक सर्कुलर के मुताबिक यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
गठबंधन क्यों टूटा?कांग्रेस ने राइजर दल के साथ संबंध खत्म करने के पीछे गठबंधन की मर्यादा और नियमों के कथित उल्लंघन को मुख्य कारण बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि राइजर दल के नेताओं ने कई मौकों पर कांग्रेस नेताओं और अन्य गठबंधन सहयोगियों के खिलाफ व्यक्तिगत एवं अपमानजनक टिप्पणियां कीं।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि राइजर दल की ओर से उसके नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर दुर्भावनापूर्ण प्रचार और व्यक्तिगत छवि खराब करने की कोशिश की गई। पार्टी के मुताबिक इस तरह की गतिविधियों से गठबंधन के भीतर आपसी विश्वास और समन्वय प्रभावित हुआ।
अखिल गोगोई के बयानों से बढ़ा विवाद गठबंधन टूटने से पहले दोनों दलों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी तेज हो गई थी। कांग्रेस नेताओं ने अखिल गोगोई के बयानों पर आपत्ति जताते हुए उन पर गठबंधन के सिद्धांतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया था।
कांग्रेस ने अपने नेताओं का बचाव करते हुए कहा कि उसके वरिष्ठ नेता असम में बाढ़ राहत और पुनर्वास जैसे मुद्दों पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही कांग्रेस नेताओं ने गोगोई की राजनीतिक भूमिका और उनके बयानों पर भी सवाल उठाए।
चुनाव के बाद बदला विपक्षी समीकरण कांग्रेस और राइजर दल पहले असम में बीजेपी के खिलाफ व्यापक विपक्षी एकजुटता का हिस्सा रहे थे। दोनों दलों ने अन्य क्षेत्रीय और वाम दलों के साथ मिलकर चुनावी मोर्चा बनाने की कोशिश की थी।
हालांकि, 2026 के असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 126 में से 82 सीटें जीतकर मजबूत बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 19 सीटें मिलीं, जबकि राइजर दल दो सीटों पर जीत दर्ज कर सका।
कांग्रेस का आगे क्या रुख रहेगा? गठबंधन खत्म करने के बावजूद कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह असम में जनता से जुड़े मुद्दों को उठाती रहेगी और बीजेपी सरकार की नीतियों पर सवाल करती रहेगी। पार्टी ने कहा है कि राइजर दल से राजनीतिक संबंध समाप्त होने का मतलब जनहित के मुद्दों पर उसके संघर्ष में कोई बदलाव नहीं होगा।
राइजर दल से दूरी बनने के बाद असम में विपक्षी राजनीति का समीकरण और बदल गया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अखिल गोगोई की पार्टी कांग्रेस से अलग होकर अपनी राजनीतिक रणनीति किस तरह आगे बढ़ाती है।
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