सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : संत हिरदाराम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, भोपाल में शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षा, संस्कार एवं जीवन-मूल्यों को समर्पित भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ छात्राओं को अनुशासन, आत्मसंयम एवं सकारात्मक जीवन-मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम में श्रद्धेय सिद्ध भाऊजी, अध्यक्ष, शहीद हेमू कालानी एजुकेशनल सोसायटी एवं जीव सेवा संस्थान, हीरो ज्ञानचंदानी, उपाध्यक्ष, एसएचकेईएस, घनश्याम बुलचंदानी, सचिव, शहीद हेमू कालानी एजुकेशनल सोसायटी, महेश दयारामानी, सचिव, जीव सेवा संस्थान ,डॉ. डालिमा पारवानी, प्राचार्या, संत हिरदाराम गर्ल्स कॉलेज, डॉ. आशीष ठाकुर, निदेशक, संत हिरदाराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड योगिक साइंसेज, डॉ. अंकेश सिंह, प्राचार्य, संत हिरदाराम कॉलेज ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज , मुख्य अतिथि प्रो. समर बहादुर सिंह, कुलसचिव, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. विवेक शर्मा, डीन एवं एचओडी, मैनेजमेंट, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, सहित विभिन्न संस्थानों के पदाधिकारी एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ संत हिरदाराम गर्ल्स कॉलेज, संत हिरदाराम नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंसेज तथा संत हिरदाराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के विद्यार्थियों द्वारा दिए गए प्रभावशाली एवं भावपूर्ण वक्तव्यों के साथ हुआ, जिनमें उन्होंने अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान की भावना व्यक्त की।

अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में श्रद्धेय श्री सिद्ध भाऊजी ने कहा कि स्व-अनुशासन जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं को अनुशासित जीवनशैली, आत्मसंयम एवं सकारात्मक सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि श्रेष्ठ जीवन-मूल्यों को अपने आचरण में उतारने का आधार है।

संत हिरदाराम संस्थानों में शिक्षक दिवस समारोह आयोजित

इस अवसर पर प्रो. समर बहादुर सिंह, कुलसचिव, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल ने छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्हें कृतज्ञता के भाव को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में प्राप्त अवसरों, मार्गदर्शन एवं सहयोग के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्ति के व्यक्तित्व को समृद्ध बनाता है और उसे संवेदनशील एवं विनम्र बनाता है। विवेक शर्मा, डीन एवं एचओडी, मैनेजमेंट, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल ने अपने संबोधन में दिमाग, वाणी और हृदय के संयम की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विचारों में सकारात्मकता, वाणी में संयम एवं मधुरता और हृदय में संवेदनशीलता व्यक्ति के व्यक्तित्व को श्रेष्ठ बनाती है। उन्होंने छात्राओं को आत्मनियंत्रण एवं संतुलित जीवन के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में डॉ. डालिमा पारवानी, प्राचार्य, संत हिरदाराम गर्ल्स कॉलेज ने शिक्षक की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल विषयगत ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन-मूल्यों, संस्कारों एवं सही जीवन-दृष्टि का मार्गदर्शन भी करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्राओं से शिक्षकों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता के भाव को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।प्राचार्य डॉ. अंकेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अनुशासन और आत्मविश्वास ही सफलता की सीढ़ी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं, प्राचार्य डॉ. आशीष ठाकुर ने शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच के आत्मीय एवं खूबसूरत रिश्ते को रेखांकित करते हुए कहा कि एक शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और जीवन-मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला प्रेरणास्रोत भी होता है।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दी गईं। शिक्षकों के सम्मान के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में गुरु-शिष्य संबंधों की गरिमा, भारतीय संस्कृति एवं जीवन-मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम ने छात्राओं को अनुशासन, संयम, कृतज्ञता एवं सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त संकाय सदस्य, कार्यालयीन कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का समापन शिक्षकों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता की भावना के साथ हुआ।


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