सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय भोपाल में हल षष्ठी तिथि पर उच्च शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश शासन के आदेश के पलिपालन में बलराम जयन्ति का आयोजन भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ एवं वनस्पति विभाग के द्वारा आयोजित हुआ जिसमे वनस्पति विभाग के डा संजय सहाय जी ने भारत मे ब्रिटिश कालीन कृषि की व्यवस्था से लेकर वर्तमान तक की कृषि उन्नति तक की हरीत कृषि क्रान्ति के बारे में बताते हुए उन्होने कहा की सभ्यता की शुरुआत कृषि से हुई और अर्थव्यवस्था में कृषि का बहुत महत्व है तीसरा और आधुनिक चरण जैवकीय खेती का है जिससे जैव विविधता प्रारंभ हुई जिससे हमारा स्वास्थ्य प्रभावित हुआ और प्रकृति का दोहन प्रारंभ हुआ अब हमारा दायित्व है कि नियंत्रित कृषि कर हम अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें I
प्राचार्य डॉ प्रतिमा यादव ने बलराम जी के बारे मे बताते हुए कहा कि बलराम शक्ति एवं परिश्रम के प्रतीक है बलराम कृषि के देवता माने जाते थे प्राकृतिक आधार पर किया गया उत्पादन ही श्रेष्ठ है सामाजिक होने के नाते हमारा दायित्व है कि हम ऐसी चीजों का विरोध करें जो हमारे जीवन के लिए हानिकारक है I
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डा महेन्द्र पाटिल जी ने त्रेता युग से लेकर महाभारत काल तक कृषि के तरीकों पर ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कृषि पंचांग के बारे में बताया एवं जीरो बजट के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हम घर में रखी सामग्री से ही बिना कोई राशि व्यय किये खाट बनाकर उसका उपयोग अपनी खेती के लिए कर सकते हैं वनस्पति विभाग की प्राध्यापक डॉ दीप्ति संकट ने बताया कि बलराम का संबंध कृषि और प्राकृतिक खेती से है I उन्होंने प्राचीन खेती के उपकरण एवं आधुनिक उपकरण को एक लघु फिल्म के माध्यम से छात्राओं को बताया I

कार्यक्रम का संचालन करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ प्रभारी डा निशा जैन ने कहा कि श्री बलराम कृषकों के आराध्य शक्ति एवं परिश्रम के प्रतीक है इस कार्यक्रम को मनाने का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को खेती करने की उस तकनीक के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए जो हमारी प्राचीन और परंपरागत है I
इस अवसर पर भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के सभी सदस्य महाविद्यालय परिवार एवं छात्राएं उपस्थित रही I
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