मुंबई। महाराष्ट्र के वरिष्ठ IAS अधिकारी और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त तुकाराम मुंढे ने अपने प्रशासनिक करियर के दौरान परिवार को झेलनी पड़ी परेशानियों और आर्थिक संघर्षों का खुलासा किया है। करीब 21 वर्षों की सेवा में 25 बार तबादलों का सामना कर चुके मुंढे ने बताया कि लगातार स्थानांतरण का असर उनके बच्चों की पढ़ाई, पत्नी के करियर और पारिवारिक जीवन पर पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि एक समय पत्नी की डिलीवरी के लिए पैसे नहीं थे, जिसके चलते उन्हें पुश्तैनी जमीन बेचनी पड़ी थी।
बेटे को पांचवीं कक्षा से पहले छह बार बदलना पड़ा स्कूल मुंढे के मुताबिक, बार-बार तबादलों के कारण उनके बेटे को अलग-अलग शहरों में स्कूल बदलने पड़े। मुंबई में सीनियर KG के बाद उसने सोलापुर, पुणे, नासिक और नवी मुंबई में पढ़ाई की। पांचवीं कक्षा तक पहुंचने से पहले उसे छह बार स्कूल बदलना पड़ा। हर बार नए स्कूल, नए माहौल और नए दोस्तों के बीच तालमेल बैठाना उसके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। मुंढे ने कहा कि बेटे को स्थायी दोस्त नहीं मिल सके और यह ऐसा नुकसान है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
पत्नी के करियर पर भी पड़ा असर उन्होंने बताया कि हर तबादले के साथ उनकी पत्नी को भी नौकरी और रहने की व्यवस्था बदलनी पड़ती थी। बार-बार नई जगह जाने के कारण उनका करियर प्रभावित हुआ। परिवार को एक साथ रखने और बच्चों को माता-पिता दोनों का साथ देने के लिए अलग-अलग शहरों में रहना भी आर्थिक रूप से मुश्किल था।
डिलीवरी के खर्च के लिए बेची पुश्तैनी जमीन मुंढे ने मुंबई में अपनी दूसरी पोस्टिंग के दौरान का अनुभव साझा करते हुए बताया कि 2013-14 में जब उनके दूसरे बच्चे का जन्म होने वाला था, तब परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। पत्नी की डिलीवरी के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने पुश्तैनी जमीन बेच दी। उस समय वह बिक्रीकर विभाग में सह आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने कहा कि आर्थिक परेशानी के बावजूद उन्होंने कभी गलत रास्ता अपनाने के बारे में नहीं सोचा। मुंढे ने स्वीकार किया कि प्रशासनिक सेवा में तबादले नौकरी का हिस्सा हैं, लेकिन उनका असर पूरे परिवार को झेलना पड़ता है।
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