मुंबई के समुद्र में लगेंगे LED विज्ञापन, करोड़ों के फ्लैट मालिकों ने जताई नाराजगी
मुंबई। मुंबई के समुद्र तटों पर तैरते हुए एलईडी विज्ञापन लगाने की योजना को लेकर विवाद शुरू हो गया है। महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (एमएमबी) की इस पहल का समुद्र किनारे रहने वाले नागरिकों, पर्यावरण संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने विरोध किया है। लोगों का कहना है कि मुंबई में समुद्र का खुला और खूबसूरत नजारा पहले ही सीमित होता जा रहा है। ऐसे में पानी के बीच बड़े-बड़े विज्ञापन लगाने से प्राकृतिक दृश्य प्रभावित होंगे।
एमएमबी ने मुंबई महानगर क्षेत्र के कई प्रमुख समुद्री इलाकों में विज्ञापन लगाने के लिए टेंडर जारी किए हैं। प्रस्तावित स्थानों में जुहू बीच, लोटस जेटी, बांद्रा-वर्ली सी लिंक जेटी, कार्टर रोड और मार्वे जेटी शामिल हैं। सितंबर में जारी 19 टेंडरों में 10 तैरते विज्ञापन बार्ज और नौ रोशनी वाले होर्डिंग से संबंधित बताए गए हैं। प्रस्तावित विज्ञापन संरचनाओं का आकार करीब 40×40 फीट बताया गया है।
विरोध बढ़ने के बाद महाराष्ट्र के बंदरगाह मंत्री और एमएमबी अध्यक्ष नीतेश राणे ने सफाई दी कि चार प्रस्तावित तैरते होर्डिंग में से दो पहले से सी लिंक के पास मौजूद हैं और केवल दो नए लगाए जाने का प्रस्ताव है।
समुद्र किनारे करोड़ों रुपये खर्च कर घर खरीदने वाले निवासियों का कहना है कि बालकनी से दिखने वाला खुला समुद्री नजारा उनके घर की खासियत है। वर्सोवा के एक निवासी ने बताया कि समुद्र के खुले दृश्य वाले तीन बेडरूम के फ्लैट की कीमत करीब 18 करोड़ रुपये तक हो सकती है। ऐसे में सामने एलईडी विज्ञापन दिखाई देना उनके लिए निराशाजनक होगा।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस योजना को रोकने की मांग की है। पर्यावरण संगठनों ने भी तेज कृत्रिम रोशनी से समुद्री जीवों और तटीय जैव विविधता पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। अब यह मुद्दा शहर के विकास, विज्ञापन से होने वाली आय और समुद्री पर्यावरण के संरक्षण के बीच बहस का विषय बन गया है।
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