सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास और सुशासन की नई इबारत लिखी जा रही है। इसी दृष्टि के तहत मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें “विरासत के साथ विकास” के मंत्र को अपनाते हुए धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के क्षेत्र में साझा संस्कृति विकसित कर रही हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का भ्रमण करते हुए कहा कि यह साझेदारी दोनों राज्यों के संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के साथ-साथ जन-कल्याण और पर्यटन के नए आयाम खोलेगी। मुख्यमंत्री यादव ने अपने वाराणसी भ्रमण की शुरुआत काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजन और दर्शन से की। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विधि-विधान से पूजन कर मध्यप्रदेश की जनता की समृद्धि और विकास की मंगलकामना की। इसके बाद उन्होंने पवित्र गंगा घाट पहुँचकर मां गंगा का पूजन किया और श्रद्धा एवं भक्ति भाव से आचमन किया। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ के धाम में आकर जो आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है, वह अद्भुत अनुभव है। उन्होंने बताया कि काशी और उज्जैन महाकाल धाम के बीच व्यवस्थाओं और सूचना के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण एमओयू किया जा रहा है, ताकि तीर्थयात्रियों को सुगम और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ के लिए भी प्रबंधन का रोडमैप तैयार करने की प्रक्रिया की समीक्षा की। बैठक में प्रेजेंटेशन के माध्यम से तीर्थस्थल प्रबंधन, क्राउड कंट्रोल, दर्शन व्यवस्था और मोबाइल-ऐप आधारित टोकन सिस्टम का अवलोकन किया गया। मुख्यमंत्री ने वाराणसी में सम्राट विक्रमादित्य पर आधारित महानाट्य का उल्लेख करते हुए बताया कि उज्जैन में इसे जन-जन तक न्यायप्रियता और सुशासन की प्रेरणा पहुँचाने के लिए 3 से 5 अप्रैल तक मंचित किया जाएगा। उन्होंने दोनों राज्यों के बीच आर्थिक और बुनियादी ढांचे के सहयोग, जैसे केन-बेतवा लिंक परियोजना, का भी उल्लेख किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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