भोपाल । जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में फेल-पास के खेल और ठेका कंपनी की गड़बडिय़ों की दोबारा जांच होगी। कुलपति डॉ. टीएन दुबे के त्यागपत्र के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने विवि के साथ मिलकर नए सिरे से मामले में जांच की तैयारी प्रारंभ कर दी है। इसके लिए विवि और चिकित्सा शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों के बीच सहमति बन गई है। विभाग की ओर से हाल में भेजे गए नए कुलसचिव निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग का निर्देशन मिलते ही समित में सदस्यों के नाम और उसकी जांच का दायरा तय कर दिया जाएगा। जांच समिति में आइटी विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा।
एमयू में परीक्षा-परिणाम से धांधली से लेकर अन्य गड़बडिय़ों के सामने आने पर कार्रवाई की बजाय जांच पर जांच होगी। पहले कराई गई अपनी ही जांच पर चिकित्सा शिक्षा विभाग फिर दोबारा जांच कराएगा। सूत्रों के अनुसार गड़बडिय़ोंं के आरोप में फंसी ठेका कंपनी और अधिकारी रसूखदार बताए जा रहे हैं। इनके प्रशासनिक और राजनीतिक रसूख के चलते सीधी कार्रवाई से जिम्मेदार बच रहे हैं। उसके बजाय फिर से जांच कराने की तैयारी है। बड़ी गड़बड़ी उजागर होने के बाद अब विभाग अपनी ही ओर से कराई गई जांच में समिति के अधिकारियों को क्षमता को लेकर असंमस में है।
विभाग के निर्देश पर तय होगा आकार
विवि स्तर पर की गई कार्रवाई के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए नए कुलसचिव डॉ. प्रभात बुधौलिया को भोपाल से निर्देश प्राप्त होने का इंतजार है। कुलसचिव के अनुसार विवि में परीक्षा-परिणाम व अनियमितता के मामले में फिर से जांच कराई जाएगी। जांच समिति में आइटी एक्सपर्ट होंगे। समिति में सदस्यों की संख्या, उनके नाम, आकार और जांच का दायरा शासन से प्राप्त निर्देशों के अनुसार होगा।
यह भी संयोग
एमयू में गड़बडिय़ोंं की जांच के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने ही तत्कालीन अधिकारियों को निर्देशित किया था। जांच में ठेका कंपनी और चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से भेजे गए जांच अधिकारी के लपेटे में आते ही मामले ने नया मोड़ ले लिया। जांच से जुड़े अधिकारियों की चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रतिनियुक्ति समाप्त की। उसके बाद चिकित्सा शिक्षा आयुक्त के विवि दौरे के चंद घंटों के बाद ही कुलपति ने कुर्सी छोड़ दी। और फिर 48 घंटे के अंदर ही दोबारा जांच की तैयारी शुरू कर दी। ये भी संयोग है कि ठेका कंपनी से जुड़े मामले की न्यायालय में सुनवाई से ठीक पहले कुलपति के इस्तीफे से लेकर नई जांच कमेटी की कवायद हुई।