लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित धर्मांतरण और महिला डॉक्टरों के उत्पीड़न से जुड़े मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छह सदस्यीय अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति गठित करने का फैसला किया है। समिति रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों, दस्तावेजों और संबंधित लोगों के पक्षों की जांच कर आगे की कार्रवाई की सिफारिश करेगी।
शुक्रवार, 6 नवंबर को कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की विशेष बैठक हुई। बैठक में एसटीएफ की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई। यह रिपोर्ट राज्य सरकार ने 30 अक्टूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन को भेजी थी। कार्य परिषद ने सर्वसम्मति से अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति बनाने का निर्णय लिया।
समिति में कुलपति और कुलसचिव के अलावा विश्वविद्यालय के दो वरिष्ठ शिक्षक तथा दो स्वतंत्र सदस्य शामिल होंगे। स्वतंत्र सदस्यों के रूप में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया जाएगा, जिनमें सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
समिति एसटीएफ की रिपोर्ट में दर्ज आरोपों और निष्कर्षों का परीक्षण करने के साथ संबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों की ओर से प्रस्तुत आपत्तियों पर भी विचार करेगी। कुछ कर्मचारियों ने रिपोर्ट में उनके नाम गलत तरीके से शामिल किए जाने का दावा किया है। कार्य परिषद ने इन आपत्तियों को भी नियमानुसार जांचने का निर्देश दिया है।
एसटीएफ की जांच में महिला डॉक्टरों और कर्मचारियों के उत्पीड़न, कथित तौर पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने और शिकायतों को दबाने जैसे आरोप सामने आए हैं। मामले में पहले भी कुछ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। हालांकि, रिपोर्ट में जिन लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, उनके खिलाफ अंतिम कार्रवाई समिति की जांच और विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार होगी।
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