सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ / एजेंसियां, भोपाल: फिल्म 'लाइफ ऑफ पाई' में समुद्र की विशाल लहरों और तूफानी हालात को देखकर दर्शक रोमांचित हो जाते हैं। लेकिन क्या ऐसी लहरों को जमीन पर भी तैयार किया जा सकता है? भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास में समुद्री इंजीनियरिंग से जुड़ी अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं इसी तरह के समुद्री हालात का वैज्ञानिक अध्ययन करने में मदद कर रही हैं। यहां विशेष वेव बेसिन और वेव फ्लूम की मदद से नियंत्रित परिस्थितियों में समुद्री लहरें तैयार की जाती हैं, जिनका इस्तेमाल जहाजों और समुद्री संरचनाओं की मजबूती जांचने के लिए होता है।

संस्थान के ओशन इंजीनियरिंग विभाग में एशिया के बड़े वेव बेसिन में शामिल एक सुविधा मौजूद है। इसमें विशेष वेव मेकर लगाए गए हैं, जो अलग-अलग प्रकार की लहरें पैदा कर सकते हैं। शोधकर्ता नियमित, अनियमित, लंबी और छोटी तरंगों के साथ टूटती हुई लहरों का भी अध्ययन करते हैं। इन प्रयोगों से यह समझने में मदद मिलती है कि समुद्र में तेज लहरों और तूफानों के दौरान जहाजों तथा समुद्री ढांचों पर कितना दबाव पड़ता है।

जहाजों और समुद्री ढांचों की होती है जांच इन प्रयोगशालाओं में छोटे मॉडल जहाजों, ऑफशोर प्लेटफॉर्म, पवन ऊर्जा टर्बाइन और तटीय सुरक्षा संरचनाओं का परीक्षण किया जाता है। सेंसर और आधुनिक डेटा रिकॉर्डिंग उपकरणों के जरिए लहरों की ऊंचाई, दबाव, गति और संरचनाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को मापा जाता है।

IIT मद्रास में 360 डिग्री फुल ब्रिज शिप सिम्युलेटर भी है, जो वास्तविक जहाज के नियंत्रण कक्ष जैसा अनुभव देता है। इसमें जहाज चलाने, दिशा बदलने और बंदरगाहों में प्रवेश जैसी परिस्थितियों का अभ्यास किया जा सकता है। समुद्री आपदाओं से निपटने में मदद इस तकनीक का इस्तेमाल बंदरगाहों की डिजाइन, तटीय सुरक्षा, जहाजों की क्षमता और समुद्री पवन ऊर्जा परियोजनाओं के अध्ययन में किया जाता है। प्रयोगशाला में वास्तविक समुद्र जैसी परिस्थितियां तैयार करने से जोखिमपूर्ण परीक्षणों को नियंत्रित माहौल में करना संभव होता है। इससे समुद्री इंजीनियरिंग, आपदा प्रबंधन और भारत की समुद्री अवसंरचना को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।


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