सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) का 39वां दीक्षांत समारोह भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मुख्य समारोह विश्वविद्यालय मुख्यालय के मैदान में आयोजित किया गया, जिसमें भारत के माननीय उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्ण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल तरनजीत सिंह सांधू विशिष्ट अतिथि थे। यह समारोह इग्नू के 51 क्षेत्रीय केंद्रों पर टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक साथ आयोजित किया गया, जिसमें कुल 3,24,835 विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। भोपाल में कार्यक्रम इग्नू क्षेत्रीय केंद्र के सभागार में संपन्न हुआ, जहां लगभग 3,063 पात्र अभ्यर्थियों में से 250 से अधिक विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इसमें स्नातक और परास्नातक स्तर के सफल विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। भोपाल क्षेत्रीय केंद्र से कुल 1,853 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी में सफलता प्राप्त की, जबकि 91 विद्यार्थियों को उत्कृष्ट श्रेणी (विविष्ट) में प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रमों में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गईं। एम.ए. (ज्योतिष) और वास्तु विषय के डिप्लोमा कार्यक्रमों में सफलता प्राप्त करने वाले 28 विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही, मॉडल अध्ययन केंद्र (कोड-1500) से जुड़े 783 विद्यार्थियों को भी प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक संख्या दर्शाता है। समारोह का शुभारंभ वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक उमेश चंद्र पांडेय के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने इग्नू की दूरस्थ एवं मुक्त शिक्षा प्रणाली की प्रासंगिकता और व्यापक पहुंच पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालय उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को हर व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विशिष्ट अतिथि प्रो. रवींद्र रामचंद्र कोंडरे ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा का उपयोग समाज, राष्ट्र और मानवता के कल्याण के लिए करें। समारोह में एक आकर्षक प्रदर्शनी का भी आयोजन हुआ, जिसमें इग्नू के विभिन्न अध्ययन केंद्रों—जैसे केंद्रीय कारागार भोपाल, मूक-बधिर संस्थान इंदौर और नूतन विक्षण संस्थान भोपाल—के विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प प्रदर्शित किए गए। इस प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता, कौशल और आत्मनिर्भरता को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।

 

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