भोपाल । राजधानी में निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। कोरोना संकट की वजह से एक तरफ कई लोगों की नौकरी चली गई तो वहीं कुछ लोगों की सेलरी कम हो गई। ऐसे में अभिभावक बच्चों की स्कूल फीस जमा करने में भी स्वयं को असमर्थ पा रहे हैं। अभिभावक पूरी फीस जमा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं शासन ने कोरोनाकाल में निजी स्कूलों को सिर्फ शिक्षण शुल्क लेने के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां बच्चों को फीस जमा न करने पर ऑनलाइन पढ़ाई, परीक्षा से वंचित किया जा रहा है। बावड़िया कलां निवासी एक अभिभावक ने वर्ल्ड-वे इंटरनेशनल स्कूल के खिलाफ मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। अभिभावक ने शिकायती आवेदन में कहा है कि उनका बेटा दसवीं में है और बेटी पांचवीं में है। पिछले साल की पूरी फीस जमा कर दी है। इस सत्र में आर्थिक स्थिति ज्यादा खराब होने के कारण बच्चों की फीस नहीं भर पाया। स्कूल शिक्षण शुल्क के साथ अन्य शुल्क की मांग भी कर रहे हैं। इस कारण बेटे का रिजल्ट भी नहीं दिया और दोनों बच्चों को ऑनलाइन कक्षा से बाहर कर दिया है। वहीं स्कूल प्रशासन ने मंगलवार से शुरू हो रही तिमाही परीक्षा में भी शामिल नहीं किया। साथ ही जून के आयोजित आतंरिक मूल्यांकन टेस्ट में भी शामिल नहीं किया। इस कारण बच्चे मानसिक रूप से परेशान होकर अवसादग्रस्त हो रहे हैं। बाल आयोग ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए 26 अगस्त को स्कूल संचालक और अभिभावक को बुलाया गया है। इस बारे में वर्ल्ड-वे इंटरनेशनल स्कूल के संचालक मनोहर पाटीदार का कहना है कि पांच साल से स्कूल प्रशासन ने अखिलेश शर्मा के बच्चों को फीस को लेकर काफी सपोर्ट किया है। उनकी आदत में यह शामिल हो गया है। उनके बच्चे को ऑनलाइन कक्षा में शामिल नहीं किया जाएगा। उधर बाल आयोग के सदस्य ब्रजेश चौहान का कहना है कि अभिभावक अखिलेश शर्मा का आरोप है कि स्कूल प्रशासन को फीस जमा करने का लिखित आश्वासन दे चुका हूं, लेकिन फिर भी बच्चों को ऑनलाइन कक्षा से नहीं जोड़ रहे हैं। स्कूल प्रशासन शिक्षण शुल्क में सभी प्रकार के शुल्क जोड़कर मांग रहा है, जो उचित नहीं। वर्ल्ड-वे इंटरनेशनल स्कूल के खिलाफ एक अभिभावक ने शिकायत की है। इस सत्र की फीस जमा नहीं करने पर बच्चों को परीक्षा में शामिल नहीं किया गया। स्कूल संचालक को नोटिस देकर आयोग में 26 अगस्त को बुलाया गया है।