सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि गो-माता और गो-पालन हमारी सनातन संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। गो-संरक्षण और संवर्धन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, जिसके माध्यम से पशुपालकों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में मध्यप्रदेश देश के कुल दुग्ध उत्पादन में लगभग 9 प्रतिशत योगदान देता है, जिसे सरकार 20 प्रतिशत तक पहुंचाने की दिशा में कार्य कर रही है।
राज्य सरकार द्वारा “दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान” चलाया जा रहा है, जिसके तहत पशु चिकित्सक गांव-गांव जाकर पशुपालकों को नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य, पोषण और आधुनिक दुग्ध उत्पादन तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं। अभियान के पहले चरण में 3.7 लाख से अधिक पशुपालकों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान किया गया। गो-संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने गो-शालाओं के लिए अनुदान राशि को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन कर दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसके लिए 600 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। प्रदेश में वर्तमान में 2900 से अधिक गो-शालाएं संचालित हैं, जिनमें 4.25 लाख गोवंश का भरण-पोषण किया जा रहा है। भोपाल में 10,000 गौवंश क्षमता की विशाल गो-शाला निर्माणाधीन है। सरकार ने “स्वावलंबी गो-शालाएं (गोकुल धाम) नीति–2025” लागू कर गो-शालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम उठाया है। इसके अंतर्गत 18 जिलों में 4235 एकड़ भूमि गो-शालाओं के लिए आवंटित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि 21 अक्टूबर को प्रदेशभर में गोवर्धन पर्व सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप मनाया जाएगा, जिसमें गौशालाएं और पशुपालक सक्रिय रूप से भाग लेंगे। भोपाल के रवीन्द्र भवन में मुख्य आयोजन होगा, जहां गोवर्धन पूजन, अन्नकूट भोग और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। मध्यप्रदेश गो-संरक्षण और दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में दृढ़ता से अग्रसर है।
#मोहनयादव #गोसंरक्षण #दुग्धसमृद्धि #मध्यप्रदेश #कृषिविकास