सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बीएमएचआरसी में ‘गर्भ संस्कार’ कार्यक्रम आयोजित, विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण सलाह भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में ‘गर्भ संस्कार’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवविवाहित दंपत्तियों एवं गर्भवती माताओं को संस्कारवान एवं स्वस्थ शिशु के निर्माण, गर्भावस्था के दौरान देखभाल, मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य तथा सकारात्मक पालन-पोषण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करना था।
कार्यक्रम में डॉ. काकोली राय, नैदानिक मनोवैज्ञानिक सलाहकार एवं डॉ. शैलजा त्रिवेदी, योग एवं आहार विशेषज्ञ विशिष्ट अतिथि वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं। बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में स्वास्थ्य केंद्रों की समन्वयक डॉ. रोमा रस्तोगी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रचिता चंसौरिया तथा प्रभारी नर्सिंग अधीक्षक अजी कोशी उपस्थित थीं। मंच संचालन डॉ. नेहल शाह ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. काकोली राय ने कहा कि अधिकांश लोग स्वास्थ्य को केवल शारीरिक दृष्टि से देखते हैं, जबकि वास्तविक स्वास्थ्य शारीरिक, मानसिक और सामाजिक तीनों आयामों के संतुलन से बनता है। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के कारण संवाद घटता जा रहा है, जिससे लोग अपनी भावनाएँ खुलकर साझा नहीं कर पाते—और यह प्रवृत्ति मानसिक अस्वस्थता को बढ़ावा दे सकती है।
उन्होंने कहा कि गर्भावस्था जैसे संवेदनशील समय में मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। आज के युवा करियर और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन बनाने को लेकर दुविधा में रहते हैं, इसलिए सही समय पर गर्भधारण की योजना बनाना जरूरी है। डॉ. राय ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान मूड स्विंग, चिंता और भावनात्मक उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं, लेकिन इनका प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ता है। इसलिए इस समय सकारात्मक वातावरण, अच्छा संगीत, प्रेरणादायक साहित्य और संतुलित दिनचर्या अपनाना चाहिए।
उन्होंने परिवार, विशेष रूप से जीवनसाथी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए ‘नॉन-जजमेंटल लिसनिंग’ पर जोर दिया। डॉ राय ने कहा कि गर्भवती महिला की बातों को बिना निर्णय के सुनना और उसे भावनात्मक सहयोग देना बेहद आवश्यक है। डॉ. राय ने पोस्टपार्टम डिप्रेशन, एंग्जायटी और साइकोसिस जैसे विषयों पर भी जागरूकता बढ़ाते हुए कहा कि यदि गर्भावस्था के दौरान मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाए, तो इन समस्याओं की संभावना कम हो जाती है।
कार्यक्रम में डॉ. शैलजा त्रिवेदी ने गर्भावस्था के दौरान योग, प्राणायाम और संतुलित आहार के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नियमित, सुरक्षित और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार योगाभ्यास करने से शरीर सुदृढ़ होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक संतुलन बना रहता है।
डॉ. त्रिवेदी ने गर्भावस्था में पारंपरिक, पौष्टिक और मौसमी आहार को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि घर का बना भोजन, पर्याप्त पानी, प्रोटीन युक्त आहार और प्राकृतिक खाद्य पदार्थ माँ और शिशु दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं। साथ ही उन्होंने जंक फूड, अत्यधिक तले-भुने खाद्य पदार्थों तथा अधिक चाय-कॉफी के सेवन से बचने की सलाह दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि ‘गर्भ संस्कार’ हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने अभिमन्यु के उदाहरण का उल्लेख करते हुए बताया कि गर्भावस्था के दौरान सीख और संस्कारों का प्रभाव शिशु के विकास पर पड़ता है।
डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। बीएमएचआरसी द्वारा ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि एक स्वस्थ, संस्कारित और जागरूक नई पीढ़ी का निर्माण किया जा सके।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विशेषज्ञों से महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

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