सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश देने से इनकार करने वाले मजिस्ट्रेट के पुराने आदेश को रद्द कर दिया है। मामला 1980 में मतदाता सूची में उनके नाम के कथित शामिल होने से जुड़ा है।
द्वारका कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले को नए सिरे से विचार के लिए फिर मजिस्ट्रेट के पास भेजने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि पहले आदेश में पर्याप्त कारण दर्ज नहीं किए गए थे और आवश्यक प्रक्रिया का पालन भी नहीं हुआ था। इसमें संबंधित पुलिस अधिकारी को सुनना और स्टेटस रिपोर्ट मांगना शामिल था।
विकास त्रिपाठी की ओर से दायर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली की मतदाता सूची में आया था, जबकि उन्होंने अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। याचिकाकर्ता ने कथित मतदाता सूची प्रविष्टि से जुड़ी परिस्थितियों की जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। अदालत ने इन आरोपों को स्थापित नहीं माना है।
अदालत ने मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि शिकायत की नए सिरे से जांच की जाए और संबंधित पक्षों को सुनने तथा जरूरी जांच के बाद कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए। मामला 29 सितंबर को एसीजेएम के समक्ष सूचीबद्ध है।
सोनिया गांधी पहले इन आरोपों से इनकार कर चुकी हैं और याचिका का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। उनके जवाब में कहा गया था कि आरोप अटकलों पर आधारित हैं और उनके समर्थन में बुनियादी दस्तावेज नहीं हैं। जवाब में दशकों पुराने रिकॉर्ड के आधार पर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने पर भी सवाल उठाए गए थे।
ताजा आदेश से कानूनी कार्यवाही फिर आगे बढ़ी है, लेकिन यह आदेश अपने आप में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश नहीं देता और न ही गांधी के खिलाफ आरोपों को साबित करता है।
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