सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ दिल्ली: नई दिल्ली। बुजुर्गों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में आयुर्वेद की संभावित भूमिका को लेकर उत्साहजनक संकेत मिले हैं। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली की ओर से हरियाणा के फरीदाबाद जिले में किए गए सामुदायिक अध्ययन में बुजुर्गों की जीवन गुणवत्ता, पाचन क्षमता और हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही डिमेंशिया यानी मनोभ्रंश से प्रभावित मरीजों के संज्ञानात्मक परीक्षणों में भी सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। संस्थान ने 24 अक्टूबर को आयोजित कार्यशाला में अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए और रिपोर्ट विशेषज्ञ समिति को सौंप दी।
5,594 बुजुर्गों की हुई स्क्रीनिंग
AIIA की जन-स्वास्थ्य पहल के तहत तीन महीने में 60 से 80 वर्ष की आयु के 5,594 बुजुर्गों की स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें आयुर्वेद आधारित औषधियां दी गईं। प्रारंभिक आकलन में 67.73 प्रतिशत प्रतिभागियों में दृष्टि संबंधी समस्याएं, 43.05 प्रतिशत में शारीरिक निष्क्रियता और 6.85 प्रतिशत में संज्ञानात्मक क्षमता में कमी पाई गई। कई बुजुर्गों में उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ ब्लड शुगर, कब्ज और नींद से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं।
अध्ययन के पहले हिस्से में 60 दिनों के हस्तक्षेप के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन के जीवन गुणवत्ता आकलन (WHOQOL) का कुल स्कोर 292 से बढ़कर 326.3 हो गया। आयुर्वेद में पाचन और चयापचय क्षमता से संबंधित अग्निबल के छह मानकों में भी सुधार दर्ज किया गया। साथ ही, अस्थि खनिज घनत्व में सकारात्मक बदलाव पाया गया। डिमेंशिया के 200 मरीजों पर भी अध्ययन डिमेंशिया पर केंद्रित अलग कार्यक्रम के तहत चार महीने में 200 मरीजों की स्क्रीनिंग कर उन्हें आयुर्वेद आधारित औषधियां दी गईं। उनके मानसिक और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए मिनी मेंटल स्टेट एग्जामिनेशन (MMSE) और 6-CIT जैसे परीक्षण किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आकलनों में सुधार के संकेत मिले। इस समूह में जीवन गुणवत्ता का स्कोर 277.4 से बढ़कर 364.2 दर्ज किया गया। इसके अलावा, सेरोटोनिन, एसिटाइलकोलीन, डीएचईए और विटामिन डी जैसे जैविक संकेतकों के स्तर में भी सुधार पाया गया।
विशेषज्ञों ने आगे के अध्ययन को जरूरी बताया संस्थान के निष्कर्ष बुजुर्गों के स्वास्थ्य में आयुर्वेद आधारित हस्तक्षेपों की संभावित उपयोगिता की ओर संकेत करते हैं। हालांकि, रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इन परिणामों की पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक मूल्यांकन, सुरक्षा की निरंतर निगरानी और आगे के अध्ययन आवश्यक हैं। डिमेंशिया के मरीज या उनके परिजन चिकित्सकीय सलाह के बिना निर्धारित उपचार बंद न करें और किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का इस्तेमाल योग्य चिकित्सक की निगरानी में ही करें।
Hashtags: #MumbaiCity #Delhi #आयुर्वेद #बुजुर्गों #राहत #डिमेंशिया #मरीजों #सुधार #सीएनएन #आयुर्वेदसेबुजुर्गोंको