सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ दिल्ली : नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इसे चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। ईसाई आदिवासी महासभा की ओर से दायर याचिका में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 के कई प्रावधानों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में इसी कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं लंबित हैं। अदालत ने संबंधित मामलों की जानकारी जुटाने और उनकी सुनवाई के समन्वय पर विचार करने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कानून के कुछ प्रावधान धार्मिक स्वतंत्रता, निजता और व्यक्तिगत स्वायत्तता को प्रभावित कर सकते हैं। याचिका में स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने की प्रक्रिया में पूर्व सूचना, सार्वजनिक जानकारी देने और संबंधित अधिकारियों के समक्ष औपचारिकताएं पूरी करने जैसी शर्तों पर आपत्ति जताई गई है। साथ ही, धर्मांतरण कराने वाले धार्मिक अगुवों के पंजीकरण से जुड़े प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कानून की व्यापक परिभाषाओं के कारण धार्मिक उपदेश और प्रार्थना सभाएं प्रभावित हो सकती हैं। चर्चों में रविवार की प्रार्थना सभाओं के दौरान अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ये आरोप याचिकाकर्ताओं के हैं, जिन पर अदालत में विचार होना बाकी है।


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