सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में माओवादी संगठन के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच छह नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया। इन छह माओवादियों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले कैडर छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्य ओडिशा में सक्रिय रहे थे। इस घटनाक्रम को क्षेत्र में माओवादी संगठन की गतिविधियों और उसके कैडरों पर पड़ रहे दबाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चार माओवादी ओडिशा में थे सक्रिय पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, छह माओवादियों ने 12 अक्टूबर को बीजापुर जिले में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इनमें चार कैडर ओडिशा में सक्रिय थे, जबकि दो पश्चिम बस्तर डिवीजन से जुड़े संगठन से अलग हुए थे।

आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता, सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष, कोसा माड़वी उर्फ सतीश, देवे माड़कम उर्फ जन्नी और लालू ताती के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इनमें चार प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य (पीपीसीएम) और दो पार्टी सदस्य (पीएम) स्तर के कैडर शामिल हैं। रानी सोढ़ी, सुक्कू कुड़ियम और पांडो पोड़ियम पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। कोसा माड़वी पर भी आठ लाख रुपये का इनाम था। देवे माड़कम पर दो लाख रुपये और लालू ताती पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस तरह छह लोगों पर घोषित इनाम की कुल राशि 35 लाख रुपये थी। आत्मसमर्पण के पीछे बताए ये कारण पुलिस के अनुसार, माओवादियों ने आत्मसमर्पण के पीछे सुरक्षा बलों के बढ़ते प्रभाव, संगठनात्मक ढांचे के कमजोर होने और माओवादी विचारधारा से मोहभंग जैसे कारण बताए। इसके अलावा, पूर्व माओवादियों के पुनर्वास और आदिवासी क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों ने भी उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।

इस आत्मसमर्पण में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), सीआरपीएफ की 170वीं बटालियन और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय की भूमिका रही। सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चलाने के साथ-साथ संगठन से जुड़े लोगों को हिंसा छोड़कर समाज में लौटने के लिए प्रेरित करने के प्रयास भी कर रही हैं। पुनर्वास नीति के तहत मिलेंगी सुविधाएं छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत इन पूर्व माओवादी कैडरों को नियमानुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी मदद उपलब्ध कराई जाएगी। उन्हें स्वरोजगार शुरू करने के लिए भी सहायता दिए जाने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य हिंसा छोड़ चुके लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने और समाज की मुख्यधारा में दोबारा शामिल होने का अवसर देना है।

सुकमा में हथियार और विस्फोटक भी बरामद इसी दौरान पड़ोसी सुकमा जिले में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के एक पुराने ठिकाने से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की। पुलिस के मुताबिक, पूर्व में आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर संयुक्त तलाशी अभियान चलाया गया था। बरामद सामग्री में राइफलें, अन्य हथियार, कारतूस और विस्फोटक उपकरण शामिल थे। बस्तर क्षेत्र में आत्मसमर्पण और हथियारों की बरामदगी से सुरक्षा एजेंसियों को माओवादी गतिविधियों पर निगरानी मजबूत करने में मदद मिल सकती है। वहीं, पुनर्वास कार्यक्रमों की प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय लोगों तक विकास सुविधाएं पहुंचाना क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।


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