सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़, भोपाल। नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भर्ती परीक्षाओं के दौरान कथित फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कई राज्यों में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों ने परीक्षा और साक्षात्कार में हिस्सा लिया था। इस मामले में आंखों की पुतली के स्कैन सहित जैविक पहचान के आंकड़ों की जांच से फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच एजेंसी के अनुसार, कथित अनियमितताएं वर्ष 2020 से 2024 के बीच आयोजित बैंक भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी हैं। छह राज्यों में जांच और छापेमारी सीबीआई की मुंबई विशेष कार्यबल शाखा ने बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर छापेमारी और जांच की गई। रिपोर्टों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में कोलकाता में तैनात एक केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर निरीक्षक भी शामिल है। अन्य तीन आरोपियों को दिल्ली और हरियाणा से गिरफ्तार किया गया।

जांच में आरोप लगाया गया है कि इस गिरोह के सदस्य बैंक भर्ती परीक्षाओं में दूसरे अभ्यर्थियों की जगह बैठते थे। इस तरीके से लिखित परीक्षा और साक्षात्कार सहित चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में कथित धोखाधड़ी की गई। मामले में कुल 135 लोगों के नाम प्राथमिकी में शामिल किए गए हैं। इनमें कथित रूप से परीक्षा में दूसरे व्यक्ति को बैठाने वाले और भर्ती प्रक्रिया से लाभ पाने वाले अभ्यर्थी शामिल हैं। आंखों के स्कैन से सामने आया फर्जीवाड़ा

आईबीपीएस ने भर्ती परीक्षाओं के दौरान जमा की गई तस्वीरों और जैविक पहचान के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें आंखों की पुतली के स्कैन तथा अन्य पहचान संबंधी विवरणों में विसंगतियां मिलीं। जांच में 257 संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान की गई। इनमें से 180 लोग विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में कार्यरत बताए गए हैं।

आईबीपीएस के विश्लेषण में 54 ऐसे कथित प्रतिरूप अभ्यर्थियों की पहचान हुई, जिन्होंने एक से अधिक उम्मीदवारों की जगह परीक्षा दी थी। जांच एजेंसी के अनुसार, इन लोगों की कथित मदद से लगभग 172 अभ्यर्थियों ने बैंक की नौकरियां हासिल कीं। यह मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि इसमें भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और वास्तविक पात्र उम्मीदवारों के अवसरों पर सवाल उठे हैं। नौकरी पर कार्रवाई की संभावना आईबीपीएस ने संदिग्ध अभ्यर्थियों के जैविक पहचान संबंधी आंकड़ों की दोबारा जांच कराने के बाद संबंधित बैंकों को जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, 180 कार्यरत अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और 177 अन्य अभ्यर्थियों को भविष्य की भर्ती परीक्षाओं से प्रतिबंधित किया गया है। संबंधित बैंकों को अपने सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, सभी संदिग्ध कर्मचारियों की नौकरी समाप्त होने का अंतिम निर्णय संबंधित बैंकों की जांच, लागू सेवा नियमों और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। केवल आरोप दर्ज होने या जांच में विसंगति मिलने से प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध अंतिम निर्णय स्वतः नहीं माना जा सकता। सीबीआई की जांच जारी सीबीआई इस कथित भर्ती घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा में प्रतिरूप अभ्यर्थियों की व्यवस्था कैसे की गई और चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में किन लोगों ने सहायता की।

यह मामला बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं में पहचान सत्यापन, जैविक जांच और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित करता है। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने के बाद ही आरोपियों की जिम्मेदारी तथा कथित फर्जीवाड़े के पूरे दायरे की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।


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