सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल अब केवल सफर तक सीमित नहीं रहेगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे और केरल राज्य विद्युत बोर्ड ने ऐसी तकनीक पर काम शुरू किया है, जिसके माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहन जरूरत पड़ने पर बिजली ग्रिड को भी बिजली दे सकेंगे। इस तकनीक को वाहन-से-ग्रिड यानी वी2जी (Vehicle-to-Grid) कहा जाता है। इसका उद्देश्य बिजली की मांग बढ़ने के समय ग्रिड को अतिरिक्त सहायता देना और ऊर्जा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है।
इस तकनीक में इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी केवल बिजली से चार्ज नहीं होती, बल्कि उपयुक्त द्विदिश चार्जर और नियंत्रण प्रणाली की मदद से बैटरी में जमा बिजली वापस घर या बिजली ग्रिड तक पहुंचाई जा सकती है। इससे शाम के समय बिजली की अधिक मांग को संभालने, सौर ऊर्जा के बेहतर उपयोग और बिजली आपूर्ति की स्थिरता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। आईआईटी बॉम्बे के ग्रिड इंटीग्रेशन लैब ने इस दिशा में तकनीकी परीक्षण और पायलट परियोजनाओं पर काम किया है।
केरल में इस परियोजना को लागू करने के लिए आईआईटी बॉम्बे और केरल राज्य विद्युत बोर्ड के बीच जुलाई 2025 में समझौता हुआ था। इसके तहत तकनीक की व्यवहारिकता, बिजली ग्रिड पर प्रभाव और उपभोक्ताओं को मिलने वाले संभावित आर्थिक लाभों का अध्ययन किया जा रहा है। हालांकि, बिजली बिल में 30 प्रतिशत कमी का दावा हर उपभोक्ता के लिए प्रमाणित सामान्य परिणाम नहीं माना जा सकता। वास्तविक बचत वाहन की बैटरी, चार्जिंग व्यवस्था, बिजली दरों और उपयोग के तरीके पर निर्भर करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, वी2जी तकनीक भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को ऊर्जा व्यवस्था का सक्रिय हिस्सा बना सकती है। इसके व्यापक इस्तेमाल के लिए उपयुक्त चार्जिंग ढांचे, तकनीकी मानकों और आर्थिक प्रोत्साहनों की जरूरत होगी।
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