सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों को 14 अक्टूबर 2026 को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। पार्टी के तीसरे नेता अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। रात तीन बजे पुलिस स्टेशन लाए जाने का दावा CJP की कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि तीनों को देर रात तक अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया और तड़के करीब तीन बजे निजी वाहन से संसद मार्ग पुलिस स्टेशन लाया गया।
पुलिस ने तीनों के खिलाफ कथित अतिक्रमण, शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बांड के उल्लंघन और सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने सहित विभिन्न आरोपों में मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, नेताओं ने बैरिकेड पार करके उस स्थान में प्रवेश किया, जिसे अब आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन CJP के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पार्टी और कुछ विपक्षी समूहों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया है।
13 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पहुंचकर राष्ट्रीय ध्वज लहराया और नारेबाजी की। पुलिस ने उन्हें रोकने के बाद हिरासत में लिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को नए निर्धारित स्थल घोषित किया है। पहले भी हिरासत में लिए गए थे नेता CJP के इन नेताओं को 10 अक्टूबर को भी दिल्ली पहुंचने पर हिरासत में लिया गया था। उस समय उन्हें शांति बनाए रखने संबंधी बांड भरने के बाद छोड़ा गया था। पुलिस का आरोप है कि जंतर-मंतर पर दोबारा पहुंचने की कार्रवाई बांड की शर्तों का उल्लंघन थी। इस मामले में CJP की कानूनी टीम ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और आगे कानूनी कदम उठाने की बात कही है। पांच दिन की न्यायिक हिरासत के आदेश के बाद मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है।
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