सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : फेरे नहीं हुए, शादी रद्द कराने पहुंचा पति, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
नई दिल्ली। विवाह की वैधता को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल रस्मों को लेकर विवाद होने से विवाह अपने आप शून्य नहीं हो जाता। पति ने अदालत में याचिका दायर कर विवाह को अमान्य घोषित करने की मांग की थी। उसका तर्क था कि शादी के दौरान फेरे नहीं हुए थे, इसलिए विवाह को कानूनी मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने याचिका खारिज कर दी। फेरे नहीं होने को बनाया विवाह रद्द करने का आधार मामले में पति ने दावा किया कि विवाह की रस्में पूरी नहीं हुई थीं और विशेष रूप से फेरे नहीं लिए गए थे। इसी आधार पर उसने विवाह की वैधता को चुनौती दी। याचिका में विवाह को अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी।
अदालत ने मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों पर विचार करते हुए यह स्पष्ट किया कि विवाह की वैधता का फैसला केवल किसी एक रस्म को लेकर किए गए दावे के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित विवाह पर लागू कानून और वास्तविक परिस्थितियों को देखना आवश्यक है। विवाह की वैधता कानून और रस्मों पर निर्भर हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 7 के अनुसार, हिंदू विवाह संबंधित पक्षों के प्रचलित रीति-रिवाजों और रस्मों के अनुसार संपन्न किया जा सकता है। जहां सप्तपदी यानी सात फेरे विवाह की आवश्यक रस्म का हिस्सा हों, वहां सातवां कदम पूरा होने पर विवाह संपन्न माना जाता है। हालांकि, सभी समुदायों और सभी विवाहों पर एक ही रस्म का नियम लागू नहीं होता।
इसी कारण विवाह में किसी रस्म के होने या न होने का सवाल संबंधित परंपरा, उपलब्ध साक्ष्य और कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय किया जाता है। केवल आरोप लगा देने से विवाह स्वतः अमान्य नहीं हो जाता। अदालत ने याचिका क्यों खारिज की? हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी। अदालत के आदेश का वास्तविक आधार समझने के लिए फैसले में दर्ज तथ्यों और कानूनी तर्कों को देखना जरूरी है। उपलब्ध शीर्षक से इतना स्पष्ट है कि अदालत ने केवल फेरे नहीं होने के दावे को विवाह शून्य घोषित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना।
विवाह से जुड़े विवादों में अदालतें यह भी देखती हैं कि संबंधित पक्षों ने कौन-सी रस्में अपनाईं, विवाह किस कानून के तहत हुआ और क्या विवाह को अमान्य घोषित करने के लिए कानून में निर्धारित आधार मौजूद हैं। विवाह संबंधी विवादों में कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण यह मामला बताता है कि विवाह की वैधता को चुनौती देने के लिए केवल व्यक्तिगत दावे या रस्मों को लेकर असहमति पर्याप्त नहीं होती। याचिका में ठोस तथ्य और लागू कानून के अनुरूप आधार प्रस्तुत करना आवश्यक है।
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