सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : डिजिटल दौर में साइबर अपराधी लोगों की तस्वीरों का गलत इस्तेमाल कर उन्हें डराने और पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे हैं। मॉर्फ्ड फोटो-वीडियो स्कैम में किसी व्यक्ति की असली तस्वीर को एडिट करके अश्लील या आपत्तिजनक रूप दिया जाता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाए गए डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल भी इस तरह की ठगी और ब्लैकमेलिंग में किया जा सकता है। कई मामलों में अपराधी तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर पैसे या निजी जानकारी मांगते हैं।
कैसे काम करता है यह स्कैम? साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्रोफाइल से तस्वीरें डाउनलोड कर सकते हैं या फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद एडिट की गई तस्वीरें या वीडियो भेजकर बदनामी का डर दिखाया जाता है। कुछ अपराधी पैसे देने के बाद भी दोबारा रकम मांगते हैं। इसलिए उनकी मांग पूरी करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी मिले तो क्या करें?
1. घबराएं नहीं और पैसे न दें: ब्लैकमेल करने वाले व्यक्ति को पैसे, बैंक विवरण, ओटीपी या अतिरिक्त निजी तस्वीरें न भेजें। उससे बातचीत सीमित करें, लेकिन सबूत सुरक्षित करने से पहले चैट या अकाउंट डिलीट न करें।
2. सबूत सुरक्षित रखें: धमकी भरे संदेश, फोन नंबर, यूजरनेम, प्रोफाइल लिंक, भुगतान की मांग और पोस्ट के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। संभव हो तो तारीख और समय भी दर्ज करें।
3. प्लेटफॉर्म पर शिकायत करें: इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स या जिस वेबसाइट पर सामग्री मौजूद है, वहां उसकी रिपोर्ट करें। गैर-सहमति से साझा की गई अंतरंग या मॉर्फ्ड तस्वीरों को हटाने की स्पष्ट मांग करें।
4. साइबर पुलिस को सूचना दें: भारत में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। पोर्टल पर महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराधों की रिपोर्टिंग के विकल्प भी उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। तत्काल खतरे की स्थिति में 112 पर कॉल करें।
फोटो या वीडियो कैसे हटवाएं? भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की गैर-सहमति से साझा की गई अंतरंग तस्वीरों से संबंधित एसओपी के तहत, संबंधित प्लेटफॉर्म को शिकायत मिलने पर ऐसी सामग्री हटाने या उस तक पहुंच बंद करने के लिए निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई करनी होती है। नवंबर 2025 में जारी एसओपी में ऐसी सामग्री के लिए 24 घंटे के भीतर कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है। प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी से भी संपर्क किया जा सकता है।
याद रखें: तस्वीर असली हो या नकली, बिना सहमति उसका आपत्तिजनक इस्तेमाल करना गंभीर मामला है। पीड़ित को शर्मिंदगी महसूस करने के बजाय मदद लेनी चाहिए। समय पर शिकायत, डिजिटल सबूत और प्लेटफॉर्म की कार्रवाई सामग्री के प्रसार को रोकने में मदद कर सकते हैं।
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