सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /   आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल   :  बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत “समाजशास्त्र पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ आज दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। यह कार्यशाला उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश के तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलगुरु नीरज गौर ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. धीरेन्द्र शुक्ला (म.प्र. उच्च शिक्षा विभाग) उपस्थित रहे। इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ सुनीता जोशी तथा कुलगुरु पद के प्रभारी एवं बीयूआईटी निदेशक नीरज गौर भी मंचासीन रहे।

कार्यक्रम का संचालन एवं स्वागत भाषण समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष रुचि घोष दस्तीदार ने किया। उन्होंने कहा कि “युवा सशक्त बने, राष्ट्र निर्माण के लिए आज हम सब संकल्पित हैं। उच्च शिक्षा सपनों को उड़ान देती है।” मुख्य अतिथि धीरेन्द्र शुक्ला ने अपने संबोधन में नई शिक्षा नीति की पृष्ठभूमि और प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह नीति 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नेतृत्व में लागू हुई थी। उन्होंने कहा कि “शिक्षकों को सेवानिवृत्ति तक युवा जैसी ऊर्जा और उत्साह बनाए रखना होगा, तभी विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है।” उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि 31 अक्टूबर तक पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देकर पोर्टल पर अपलोड किया जाए, ताकि सत्र 2026–27 से इसे समय पर लागू किया जा सके।  विषय विशेषज्ञ प्रो. सुनीता जोशी ने कहा कि समाजशास्त्र विषय भारतीय ज्ञान परंपरा से गहराई से जुड़ा है, और नई शिक्षा नीति ने पाठ्यक्रम में समग्र विकास व गतिविधि-आधारित शिक्षा की अवधारणा को प्रमुखता दी है।  कुलगुरु पद के प्रभारी नीरज गौर ने कहा कि नया पाठ्यक्रम संयुक्त परिवार की तरह होना चाहिए, जहाँ हर इकाई विद्यार्थी के संतुलित और गुणवत्तापूर्ण विकास में सहायक बने।

अन्य अतिथि  इस अवसर पर विश्वविद्यालय एवं विभिन्न संस्थानों से अनेक प्राध्यापक और विद्वान उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से— प्रोफेसरगण:

प्रो. हर्नीत चीमा, प्रो. मधुविलता दुबे, प्रो. महेश शुक्ला, प्रो. शैलजा दुबे, प्रो. कुमरेश एस. कश्यप, प्रो. अनीता धुर्वे, डॉ. अर्चना शर्मा, डॉ. रंजना श्रीवास्तव, डॉ. एच.एम. मिश्रा, डॉ. वासुदेव जादोन, डॉ. तैयबा खातून, डॉ. स्वाति शुक्ला, डॉ. अनीला मित्रा, डॉ. कलावती कोरीने अपनी उपस्थिति और सहयोग से कार्यशाला को सफल बनाया। कार्यशाला की रूपरेखा  प्रथम दिवस पर बीज वक्तव्यों के पश्चात् स्नातक द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के पाठ्यक्रम पर विस्तृत चर्चा हुई। द्वितीय दिवस (18 सितंबर) को स्नातकोत्तर तृतीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के पाठ्यक्रम पर विचार-विमर्श एवं सामूहिक प्रस्तुतीकरण किया जाएगा।  धन्यवाद ज्ञापन  अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. कुमरेश कश्यप द्वारा किया गया। इस कार्यशाला से यह अपेक्षा है कि समाजशास्त्र विषय के नए पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को समाहित करते हुए विद्यार्थियों को अधिक समग्र, प्रासंगिक और कौशल-आधारित शिक्षा प्राप्त होगी, जिससे वे समाज और राष्ट्र निर्माण में सशक्त भूमिका निभा सकेंगे।

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