सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ दिल्ली: नई दिल्ली: वरिष्ठ पत्रकार और लेखक आनंद कौशल का पहला ग़ज़ल एवं शायरी संग्रह ‘हमनशीं’ प्रेम, विरह, तन्हाई, रिश्तों और उम्मीद जैसे मानवीय एहसासों को सरल और संवेदनशील भाषा में प्रस्तुत करता है। यह संग्रह उन भावनाओं को शब्द देने का प्रयास है, जिन्हें अक्सर लोग अपने मन में संजोए रखते हैं, लेकिन व्यक्त नहीं कर पाते।
‘हमनशीं’ में मोहब्बत और जुदाई के साथ इंतजार, यादों, अकेलेपन तथा जीवन के अनुभवों की झलक मिलती है। संग्रह की कई रचनाएं रोजमर्रा के भावनात्मक अनुभवों से जुड़ती हैं। इनकी भाषा सहज है, जिसमें हिंदी की सरलता और उर्दू की नज़ाकत का मेल दिखाई देता है। कठिन शब्दों के बजाय भावों की स्पष्टता और अभिव्यक्ति की सादगी पर जोर दिया गया है।
आनंद कौशल की शायरी केवल व्यक्तिगत प्रेम और विरह तक सीमित नहीं रहती। कुछ रचनाओं में सामाजिक परिस्थितियों, आम आदमी की चुनौतियों और राजनीति के बदलते स्वरूप पर भी टिप्पणी दिखाई देती है। इस तरह संग्रह में निजी संवेदनाओं के साथ सामाजिक सरोकारों को भी जगह मिली है।
पुस्तक की समीक्षा करने वाले लेखकों और पत्रकारों ने इसकी सहज अभिव्यक्ति तथा भावनात्मक जुड़ाव को रेखांकित किया है। उनके अनुसार, संग्रह की रचनाएं पाठक को अपने अनुभवों और स्मृतियों से जोड़ती हैं।
साहित्यग्राम प्रकाशन से प्रकाशित ‘हमनशीं’ में कुल 79 पृष्ठ हैं। इसकी ई-बुक भी उपलब्ध है। आनंद कौशल की यह पहली कृति पत्रकारिता से इतर उनके साहित्यिक और रचनात्मक पक्ष को सामने लाती है। ग़ज़ल और शायरी में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह संग्रह प्रेम, पीड़ा और उम्मीद के विविध रंगों से परिचित कराता है।
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