आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हर साल IPL का बिगुल बजने का इंतजार भारत की लगभग आधी आबादी कर रही होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी इसी बेकरारी ने IPL की कमाई में 12 गुना इजाफा किया है।
कमाई किस तरह बढ़ी, इसे यूं समझिए। IPL के मैच टेलीकास्ट के राइट्स की डील 5 साल से 10 साल के लिए होती है। मगर इसे औसत सालाना कमाई में बांटें तो 2008 में IPL ने मीडिया राइट्स बेचकर 820 करोड़ रुपए कमाए थे। 2023 में ये कमाई बढ़कर 9,978 करोड़ रुपए हो चुकी है।
IPL के पैदा होने से पहले ही BCCI दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड का खिताब पा चुका था। अब BCCI के लिए IPL सबसे कमाऊ पूत साबित हुआ है।
2006-07 में BCCI की कमाई 651.81 करोड़ रुपए थी…और 2021-22 में बोर्ड की कुल कमाई 4,360 करोड़ हो गई। इसमें अकेले IPL का योगदान ही करीब 2,200 करोड़ रुपए था।
2019 में IPL की ब्रांड वैल्यू 47,500 करोड़ रुपए थी। ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में IPL की ब्रांड वैल्यू बढ़कर करीब 70 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।
एक मैच से कमाई के मामले में IPL अब सिर्फ अमेरिका के NFL से ही पीछे है। एक मैच से व्यूअरशिप, स्पॉन्सरशिप, लाइसेंसिंग और टिकट सेल को मिलाकर IPL करीब 130 करोड़ रुपए कमाता है। हालांकि, प्लेयर्स पर खर्च के मामले में IPL बाकी स्पोर्टिंग लीग्स से अभी काफी पीछे है।
आज हम आपको बताएंगे कि दुनिया की सबसे बड़ी स्पोर्ट्स लीग में शुमार हो चुकी IPL का अर्थशास्त्र क्या है?
पहले समझिए IPL से BCCI की कमाई कैसे होती है
आज IPL किसी भी बड़े कॉरपोरेट घराने जैसी एक इकोनॉमिक मशीन है। इसके संचालन का पूरा अधिकार BCCI के पास है। IPL की कमाई को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है…
पहला हिस्सा सेंट्रल पूल : सेंट्रल पूल में तीन सोर्स से कमाई आती है। और बंटती भी तीन हिस्सों में है।
दूसरा हिस्सा फ्रेंचाइजी की कमाई: इसमें कमाई के तीन मुख्य जरिये होते हैं। जबकि ये दो हिस्सों में बंटती है। 80% हिस्सा फ्रेंचाइजी को मिलता है।
तीसरा हिस्सा फ्रेंचाइजी फीस : IPL में आने वाली हर टीम का ओनर ऑक्शन के जरिये तय होता है। सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को टीम की फ्रेंचाइजी दी जाती है।