नई दिल्ली । दक्षिण अफ्रीका ने दुनिया को बेहतरीन ऑलराउंडर दिए हैं। शॉन पॉलक भी इनमें से एक हैं। उनके हाथ में जब गेंद होती थी तो बल्लेबाज रन बनाने को तरस जाते थे। जरूरत पड़ने पर वह बल्ले से भी धमाल मचा देते थे। उन्होंने अपने करियर में कई मौकों पर अपनी टीम को अपने बलबूते संकट से बाहर निकाला। वह काफी समय तक दक्षिण अफ्रीका की टीम के कप्तान भी रहे हैं। पॉलक 16 जुलाई को वो इस दुनिया में आए थे, मतलब शनिवार को उनका जन्मदिन है। पॉलक के खून में ही क्रिकेट था, इसलिए उन्हें क्रिकेटर बनने के लिए कहीं बाहर से प्रेरणा नहीं लेनी पड़ी। उनके पिता पीटर पॉलक दक्षिण अफ्रीका की तरफ से क्रिकेट खेले थे।

शॉन पॉलक के पिता पीटर 60 के दशक में दक्षिण अफ्रीका की तेज गेंदबाजी आक्रमण के अगुआ थे। जबकि अंकल ग्रैम पॉलक की गिनती दुनिया के बेहतरीन बाएं हाथ के बल्लेबाजों में होती है। शॉन के दादा, परदादा और भाई भी क्रिकेटर थे। ऐसे में शॉन के क्रिकेटर बनने की नींव घर से ही पड़ गई थी। उन्होंने 1995-96 में इंग्लैंड के दक्षिण अफ्रीका दौरे से इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था। नवंबर 1995 में पॉलक ने इंग्लैंड के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया। पहली ही पारी में उन्होंने 3 विकेट झटककर अपनी काबिलियत साबित कर दी थी। हालांकि, इस टेस्ट मैच में बारिश के कारण दो दिन का खेल ही हो पाया। इसलिए पॉलक की बल्लेबाजी नहीं आ पाई। 2 महीने बाद पॉलक ने जनवरी 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ ही अपना वनडे डेब्यू किया। अपने पहले वनडे में पॉलक ने ऑलराउंड खेल दिखाया और 66 रन की पारी खेलने के साथ 4 विकेट भी झटके।

इसके बाद पॉलक ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक-एक कर सफलता की सीढ़ी चढ़ते गए। वह दक्षिण अफ्रीका की तरफ से टेस्ट में सबसे पहले 400 विकेट लेने वाले गेंदबाज बने, जब उन्होंने टेस्ट में 200 विकेट पूरे किए थे, तो लिस्ट में शामिल 41 गेंदबाजों में पॉलाक का औसत सबसे कम था। टेस्ट में बेहतरीन गेंदबाजी के साथ-साथ उन्होंने शानदार बल्लेबाजी भी की।

पॉलक ने टेस्ट में दो शतक लगाए और उनकी दोनों ही सेंचुरी नंबर-9 पर बल्लेबाजी करते हुए आई। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 2001 में टेस्ट मैच में नंबर-9 पर खेलते हुए 111 रन बनाए थे। इसी साल उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ भी नंबर-9 पर आकर नाबाद शतक ठोका था। पॉलक के नाम 9वें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए सबसे ज्यादा टेस्ट शतक लगाने का रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने इस नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए दो शतक जड़े जो रिकॉर्ड आज भी बरकरार है।

पॉलक को हैंसी क्रोन्ये का मैच फिक्सिंग कांड में नाम आने के बाद अप्रैल 2000 में दक्षिण अफ्रीका की कप्तानी मिली। उन्होंने कप्तानी की अच्छी शुरुआत की। लेकिन 2001-02 में ऑस्ट्रेलिया के हाथों मिली 3-0 की हार के बाद उनकी कप्तानी का ग्राफ नीचे गिरता गया। 2003 में दक्षिण अफ्रीका में हुए वनडे विश्व कप में पॉलक टीम के कप्तान थे। लेकिन, मेजबान होने के बावजूद अफ्रीकी टीम सुपर-सिक्स में भी नहीं पहुंची। वेस्टइंडीज को हराने के लिए आवश्यक डी/एल स्कोर की गलत गणना करने के बाद दक्षिण अफ्रीका को घर में खेले गए विश्व कप में पहले दौर से बाहर होना पड़ा। यह कप्तान के रूप में उनका आखिरी मैच था।