भोपाल । रोना से ठीक हो चुके लोगों को अब आलस और कमजोरी की शिकायत है। इस कारण वह अपना कार्य भी ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के कारण फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और मांसपेशियों में कमजोरी आने से हमेशा थकान बनी रहती है। ऐसे मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। डॉ. राघवेंद्र शर्मा ने कहा कि ऐसे लोगों को रोज 20 से 25 मिनट घूमना चाहिए।
वरिष्ठ चेस्ट फिजीशियन डॉ. उज्जवल शर्मा के मुताबिक ओपीडी में 25 से 30 प्रतिशत कोरोना से ठीक हो चुके लोग ऐसे आ रहे हैं जिन्हें कमजोरी व आलस की शिकायत है। इन मरीजों को फेफड़ों को मजबूत करने की दवा, सांस लेने व छोडऩे की व्यायाम के साथ पौष्टिक व प्रोटीन युक्त खाना खाना चाहिए। वहीं डॉ. प्रदीप प्रजापति ने कहा कि कोरोना के जो मरीज डेढ़ सप्ताह से अधिक अस्पतालों में भर्ती रहे। उनमें अत्यधिक कमजोरी और थकावट की शिकायत है। इन्हें संतुलित आहार लेने के साथ नियमित व्यायाम करना चाहिए।
थकावट के साथ कमजोरी थी
सरकारी नौकरी में कार्यरत कोरोना संक्रमण से ठीक हुए हुए रामदयाल वर्मा को मई में कोरोना संक्रमण हुआ था। अब उन्हें दिनभर थकावट रहने के साथ अत्यधिक कमजोरी महसूस होती है जिसके कारण उनका काम भी प्रभावित हो रहा था। जब उनकी पीएफपी यानी पल्मोनरी फंग्शनल टेस्ट कराया गया तो फेफड़े की कमजोरी का पता चला। इसके बाद उनकी फेफड़े मजबूत करने की दवाएं दी गईं, अब वे पूरी तरह ठीक हैं। पेशे से व्यापारी साकेत नगर निवासी एक व्यक्ति को मई में कोरोना होने के कारण हॉस्पिटल में भर्ती रहना पड़ा था। अब ठीक होने के बाद अत्यधिक थकावट रहती है। हालत यह थी कि चलने-फिरने में भी दिक्कत होती थी। जांच करने पर पता चला कि उनके शरीर में प्रोटीन की मात्रा काफी कम थी तथा फेफड़े की सांस की नलियों में सूजन आ गई थी। इलाज करने के बाद उन्हें आराम मिला।