सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़/ इंटीग्रेटेड ट्रेड न्यूज़ भोपाल / सागर : सहकारिता विभाग के संयुक्त पंजीयक डॉ. शिवेन्द्र देव पाण्डेय के विरुद्ध सागर ई.ओ.डब्ल्यू. द्वारा रिश्वत मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर अब उच्च स्तरीय विवेचना की मांग उठ रही है। इस संबंध में सहकारिता क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता एवं विभागीय प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक पत्र भेजा है।
पत्र में कहा गया है कि दिनांक 23 जुलाई को डॉ. पाण्डेय पर ₹50,000 की रिश्वत लेने का आरोप दर्ज किया गया, जिसकी सूचना एक समाचार पत्र में प्रकाशित हुई। आवेदनकर्ता ओम पाटीदार ने इस कार्रवाई पर संदेह जताते हुए इसे एक ‘सुनियोजित षड्यंत्र’ बताया है। उन्होंने लिखा कि डॉ. पाण्डेय की ईमानदारी और निष्कलंक सेवा की चर्चा विभागीय स्तर पर हमेशा से होती रही है, ऐसे व्यक्ति पर आरोप लगना स्वाभाविक रूप से अनेक प्रश्न खड़े करता है।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि कथित प्रकरण में की गई वॉयस रिकॉर्डिंग की प्रमाणिकता की जांच सबसे पहले की जानी चाहिए। साथ ही इस पूरे मामले की फाइल सागर ई.ओ.डब्ल्यू. से मंगाकर प्रगामी विवेचना भोपाल मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए।
इसके अतिरिक्त यह आरोप भी सामने आया है कि छापामारी के दौरान ई.ओ.डब्ल्यू. टीम द्वारा सहकारिता कार्यालय के दो कर्मचारियों – श्री बबलू यादव और मनीष पटेल – के साथ कथित रूप से मारपीट की गई, जिसकी स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग भी पत्र में की गई है।
इस मामले में प्रतिलिपि सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव म.प्र. शासन एवं ई.ओ.डब्ल्यू. के महानिदेशक को भी भेजी गई है, ताकि वस्तुस्थिति की निष्पक्ष पड़ताल की जा सके और किसी ईमानदार अधिकारी के विरुद्ध जल्दबाज़ी में कार्रवाई न हो।
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