सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO और रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो विवाद का कारण बन गया है। वीडियो में एक व्यक्ति को डांस करते और शराब पीते हुए दिखाया गया है और दावा किया जा रहा है कि यह जितेंद्र मिश्रा हैं, जो राम मंदिर ट्रस्ट के CEO बनने के बाद जश्न मना रहे हैं। फैक्ट-चेक में यह दावा गलत पाया गया है।वायरल वीडियो में जितेंद्र मिश्रा नहीं फैक्ट-चेक रिपोर्टों के मुताबिक वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति राम मंदिर ट्रस्ट के CEO जितेंद्र मिश्रा नहीं है। वीडियो की तुलना जितेंद्र मिश्रा की उपलब्ध तस्वीरों से करने पर भी दोनों व्यक्तियों में अंतर सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार यह वीडियो नवंबर 2025 का पुराना फुटेज है और इसका जितेंद्र मिश्रा की सितंबर 2026 में हुई नियुक्ति से कोई संबंध नहीं है।

नियुक्ति के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से फैला वीडियो रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को 2 सितंबर 2026 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किया गया था। इसके बाद उनके नाम और तस्वीरों से जुड़े कई पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुए। इसी दौरान पुराने वीडियो को उनके नाम से जोड़कर शेयर किया गया। जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख रहे थे। राम मंदिर ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति के बाद मंदिर प्रशासन में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हुई है।

राजनीतिक विवाद ने भी पकड़ा जोर वायरल वीडियो को कुछ राजनीतिक सोशल मीडिया अकाउंट्स से भी शेयर किया गया, जिसके बाद इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगीं। हालांकि, फैक्ट-चेक में वीडियो के दावे को गलत बताया गया है। एक रिपोर्ट में वीडियो शेयर करने वाले कांग्रेस से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा बाद में सफाई दिए जाने का भी उल्लेख है।

पुराना वीडियो, नया दावा इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि वीडियो का फुटेज पुराना है और उसमें मौजूद व्यक्ति को जितेंद्र मिश्रा बताने का कोई विश्वसनीय आधार नहीं मिला। इसलिए सोशल मीडिया पर किए जा रहे उस दावे को सही नहीं माना जा सकता कि राम मंदिर के नए CEO ने अपनी नियुक्ति का जश्न शराब और डांस के साथ मनाया। सोशल मीडिया पर किसी सार्वजनिक व्यक्ति से जोड़कर वायरल किए गए वीडियो को बिना स्रोत और तारीख की पुष्टि किए शेयर करना भ्रामक सूचना को बढ़ावा दे सकता है। इस मामले में भी पुराने वीडियो को नई घटना से जोड़कर पेश किया गया।


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