सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को हटाए जाने के बाद मलबे के नीचे एक पुराना कुआं मिलने से विवाद और बढ़ गया है। कुएं की जानकारी सामने आने के बाद हिंदू संगठनों और नेताओं की ओर से इसे लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। साध्वी प्राची ने स्थल की खुदाई की मांग की है, जबकि स्वामी यशवीर महाराज ने दावा किया है कि यहां पहले मंदिर रहा होगा। हालांकि, अभी तक मंदिर होने के दावे की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मलबा हटाने पर सामने आया कुआं मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद जब मलबा हटाया गया तो जमीन के नीचे एक पुराना कुआं मिला। रिपोर्टों के अनुसार कुआं करीब 20 मीटर गहरा बताया जा रहा है और उसके ऊपर भारी स्लैब लगा हुआ था। प्रशासन ने फिलहाल सुरक्षा के मद्देनजर कुएं को ढक दिया है और आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन अब कुएं की उम्र और ऐतिहासिक महत्व का पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के विशेषज्ञों की मदद लेने की तैयारी कर रहा है। इसलिए फिलहाल कुएं को लेकर किसी ऐतिहासिक निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

स्वामी यशवीर ने मंदिर होने का किया दावा स्वामी यशवीर महाराज ने दावा किया कि जिस स्थान पर मस्जिद थी, वहां पहले प्राचीन मंदिर हो सकता है। उन्होंने स्थल की जांच और खुदाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में ऐतिहासिक तथ्यों की पड़ताल होनी चाहिए। हालांकि, मंदिर होने का यह दावा अभी केवल एक दावा है। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई आधिकारिक पुरातात्विक निष्कर्ष सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि वहां पहले मंदिर मौजूद था।

साध्वी प्राची का विवादित बयान कुएं को लेकर साध्वी प्राची ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्थल की खुदाई की मांग करते हुए कहा, "कुएं में शव मिले तो तुम्हारा, शिवलिंग मिला तो हमारा।" उनके इस बयान के बाद विवाद और तेज हो गया। साध्वी प्राची ने यह भी कहा कि यदि खुदाई में कोई धार्मिक या ऐतिहासिक अवशेष सामने आते हैं तो उनकी जांच होनी चाहिए। हालांकि, उनके द्वारा किए गए अन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इमरान मसूद ने बताया वजू के लिए इस्तेमाल होने वाला कुआं दूसरी ओर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कुएं को लेकर अलग प्रतिक्रिया दी है। उनके मुताबिक यह कुआं मस्जिद में वजू के लिए इस्तेमाल किया जाता था। उन्होंने लोगों से अपील की कि कुएं की खोज को सांप्रदायिक रंग देने या उसके आधार पर बिना जांच के निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए।

अब जांच से साफ होगी तस्वीर सहारनपुर में मस्जिद हटाए जाने के बाद मिला कुआं अब पूरे विवाद का नया केंद्र बन गया है। एक पक्ष इसे पुराने धार्मिक ढांचे से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से इसे मस्जिद में इस्तेमाल होने वाला कुआं बताया जा रहा है। ऐसे में वास्तविक स्थिति जानने के लिए पुरातात्विक और प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण होगी। कुएं की संरचना, निर्माण शैली, उम्र और आसपास मिले संभावित अवशेषों की वैज्ञानिक जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है। फिलहाल मंदिर होने का दावा प्रमाणित तथ्य नहीं है और जांच पूरी होने तक इसे दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


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