सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सोनम वांगचुक ने केंद्र को दिया एक साल का अल्टीमेटम, लद्दाख में विधानसभा की मांग

लद्दाख की संवैधानिक और राजनीतिक मांगों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को एक साल का समय दिया है। उन्होंने कहा है कि केंद्र को संसद के आगामी विंटर सेशन में लद्दाख बिल पेश कर उसे पास करना चाहिए और इसके बाद अगले एक साल के भीतर लद्दाख में अपनी विधानसभा और सरकार के गठन की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए।

पहले विधानसभा, फिर बड़े फैसले सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख में सबसे बड़ी समस्या यह है कि वहां विधानसभा के अस्तित्व में आने से पहले ही कई बड़े प्रशासनिक फैसले लिए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, पहले जनता की चुनी हुई विधानसभा का गठन होना चाहिए और उसके बाद क्षेत्र से जुड़े बड़े फैसले लिए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि विधानसभा को सर्वोच्च संस्था होना चाहिए और नौकरशाही उसके अधीन काम करे। कानून-व्यवस्था, वित्तीय अधिकार और लद्दाख के प्रशासन से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रमुख भूमिका होनी चाहिए।

राज्य के दर्जे पर बदला रुख पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग पर वांगचुक ने अपना रुख कुछ नरम किया है। उन्होंने कहा कि पहली कोशिश में सभी मांगें हासिल करना जरूरी नहीं है। यदि केंद्र को लगता है कि लद्दाख फिलहाल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं है, तो क्षेत्र के लिए एक ऐसा लोकतांत्रिक ढांचा बनाया जा सकता है, जिसमें उसे अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करने और आत्मनिर्भर बनने का समय मिले। उन्होंने संकेत दिया कि 5 से 10 साल बाद पूर्ण राज्य के दर्जे की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

छठी अनुसूची की मांग भी अहम लद्दाख के लिए लंबे समय से छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा की मांग भी उठती रही है। वांगचुक और लद्दाख के अन्य संगठनों की प्रमुख मांगों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक सुरक्षा और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा शामिल रही है। हाल के दिनों में लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने भी केंद्र के साथ बातचीत में ठोस प्रगति की मांग की है। संगठन ने संकेत दिया है कि बातचीत से परिणाम नहीं निकलने पर आंदोलन को फिर तेज किया जा सकता है।

शराब की दुकानों पर भी सरकार को घेरा वांगचुक ने लद्दाख में नई शराब की दुकानें खोलने के प्रयासों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ड्रग्स की समस्या का समाधान शराब नहीं हो सकता। उनके मुताबिक, युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए।

पर्यावरण को लेकर जताई चिंता नेपाल में हालिया आपदा का जिक्र करते हुए वांगचुक ने हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत को पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर और गंभीरता से काम करने की जरूरत है। उनके मुताबिक, हिमालय करोड़ों लोगों के जीवन और जल संसाधनों से जुड़ा हुआ है और पर्यावरणीय संकट को नजरअंदाज करना भविष्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

सोनम वांगचुक का यह एक साल का अल्टीमेटम ऐसे समय आया है जब केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है। अब नजर इस बात पर होगी कि आगामी वार्ताओं में केंद्र सरकार लद्दाख की राजनीतिक और संवैधानिक मांगों पर किस तरह का रोडमैप सामने रखती है।


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