सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : शी जिनपिंग के दौरे से पहले भारत का सख्त रुख, सीमा पर दो टूक

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले नई दिल्ली ने सीमा विवाद को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। भारत ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के संबंधों में सुधार की राह सीमा पर शांति और स्थिरता से होकर गुजरती है। लद्दाख में 2020 के सैन्य तनाव के बाद भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति के बिना द्विपक्षीय संबंध सामान्य नहीं हो सकते।

सीमा पर स्थिति को बताया सबसे अहम भारत का रुख है कि LAC पर किसी भी तरह की घटना या यथास्थिति में बदलाव की कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा। विदेश मंत्रालय की ओर से पहले भी कहा गया है कि सीमा पर शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों की समग्र स्थिति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यानी दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिशों के बावजूद सीमा का मुद्दा भारत की प्राथमिक चिंताओं में बना हुआ है।

शी जिनपिंग के दौरे से पहले अहम समझौता शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता में सीमा प्रबंधन को लेकर आठ बिंदुओं पर सहमति बनी। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी ने वार्ता में हिस्सा लिया। दोनों देशों ने LAC पर सैन्य संचार मजबूत करने के लिए पूर्वी और मध्य सेक्टर में दो नए हॉटलाइन चैनल बनाने पर सहमति जताई है। इसके अलावा वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की बैठकों के लिए दो अतिरिक्त बैठक बिंदु भी तय किए गए हैं।

सीमा विवाद के समाधान की दिशा में भी बातचीत भारत और चीन ने सीमा विवाद के समाधान के लिए 2005 में तय राजनीतिक मानकों और मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर बातचीत आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। सीमा निर्धारण से जुड़े विशेषज्ञ समूह और सीमा प्रबंधन से जुड़े तंत्र को आगे की बातचीत का जिम्मा दिया गया है। हालांकि, इसे सीमा विवाद के समाधान का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमा को लेकर मतभेद अभी भी कायम हैं और किसी विशिष्ट क्षेत्र में अंतिम सीमा निर्धारण पर कोई व्यापक समझौता सामने नहीं आया है।

भारत का संदेश साफ शी जिनपिंग की संभावित यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय बाद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संपर्क का मौका हो सकती है। लेकिन भारत की प्राथमिकता स्पष्ट है—सीमा पर स्थिरता के साथ ही संबंधों को आगे बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए हॉटलाइन तंत्र और सैन्य बैठक बिंदु LAC पर तनाव कम करने में कितने प्रभावी साबित होते हैं और सीमा विवाद पर बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।


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