भोपाल । प्रदेश की ग्रामीण सड़कों को टीकाऊ और मजबूत बनाने के लिए अब नैनो टेक्रोलॉजी का सहारा लिया जाएगा। प्रदेश की पहली वाटर प्रूफ सड़क राजगढ़ जिले के जीरापुर क्षेत्र में अरन्या से मुकुंदपुरा तक होगी। नैनो टेक्नालॉजी वाली 2.7 किमी लंबी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क इस तकनीक से बनाई जाएगी। अपनी तरह की विशेष तकनीक वाली इस सड़क का बेस केमिकल युक्त मिट्टी से तैयार होगा। मिट्टी की कठोरता बढ़ाकर वॉटर प्रूफ कोट के जरिए बनने वाली इस सड़क में बोल्डर, गिट्टी की जरूरत अन्य सड़कों की तुलना में सिर्फ 30 फीसदी होगी।
ऐसा करने से सड़क बनाने में लगने वाले खनिज की बचत के साथ ही प्रति किमी करीब 5 लाख रुपए कम खर्च आएगा। सड़क बनाने वाली कंपनी जायडेक्स इंडस्ट्रीज के टेक्निकल इंजीनियर लाभांश नलवड़े के अनुसार 167.50 लाख की लागत वाली इस सड़क की खुदाई कर बेस तैयार कर लिया है। सितंबर के अंत में इसे बनाना शुरू कर देंगे। होशंगाबाद में पहले इस तकनीक से सड़क बनाई जा चुकी है, लेकिन वह एमपीआरडीसी की सड़क थी। मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के महाप्रबंधक सीएस भटनागर बताते हैं कि खास तकनीक वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की यह मप्र की पहली सड़क होगी।
प्लास्टिक कचरे से बनेगा डामर
सड़क बनाने में प्लास्टिक वेस्ट डामर का उपयोग भी किया जा रहा है। प्राधिकरण के एजीएम एसएम माथुर बताते हैं कि 150 किमी लंबी सड़कों में इसका उपयोग किया गया। इससे सड़कों में बारिश का पानी आसानी से नहीं रिसता और सड़कें टिकाऊ होती है। उपयोग का दायरा बढ़ाने के लिए डामर बनाने की इकाई राजगढ़ में लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
नई तकनीक के लाभ
नई तकनीक में सड़क का सब बेस और बेस 30 प्रतिशत गिट्टी और 70 प्रतिशत मिट्टी से बनेगा। सीमेंट और केमिकल मिलाकर मिट्टी की कठोरता बढ़ाएंगे। अन्य सड़कों की तुलना में गिट्टी का उपयोग 70 फीसदी कम होगा। इससे खनिज की बचत होगी, जो सीमित संसाधनों की श्रेणी में आता है। प्रति किमी में करीब 5 लाख रुपए तक की बचत भी होगी। सब बेस और बेस के ऊपर वाटर प्रूफ लेयर, बारीक चूरी से डामरीकरण कर फिर से वाटर प्रूफ लेयर बिछाई जाएगी। वाटर प्रूफ लेयर से बारिश का पानी सड़क में आसानी से नहीं रिसेगा। ऐसे में सड़क टिकाऊ और लंबे समय तक मजबूत रहेंगी। बिटुमिन (डामर) में निर्धारित मापदंड अनुसार प्रति टन 1 किलो जायकोथर्म नामक एक विशेष केमिकल मिलाया जाएगा। इस तकनीक से सड़कों में आसानी से गड्ढे नहीं होंगे। चूरी की पकड़ मजबूती ज्यादा रहेगी।