सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधियों के बीच आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर तीखी बहस टकराव में बदल गई। 27 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक के दौरान अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज और क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पारिला के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विवाद बढ़ने पर महासभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। यह बहस क्यूबा पर दशकों से लागू अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त करने के प्रस्ताव पर मतदान से पहले हुई।

‘पीछे हटिए, यह हवाना नहीं’ अमेरिकी राजदूत वॉल्ट्ज अपने संबोधन में क्यूबा की सरकार पर भ्रष्टाचार और नेताओं की आलीशान जीवनशैली के आरोप लगा रहे थे। इसी दौरान क्यूबा के विदेश मंत्री पारिला पोडियम के पास पहुंचे और अमेरिकी राजदूत पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। दोनों के बीच बहस तेज हो गई।

वॉल्ट्ज ने पारिला से पीछे हटने को कहा और टिप्पणी की, “यह हवाना नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि क्यूबा का नेतृत्व अपने देश में असहमति की आवाजों को दबाता है। दूसरी ओर, पारिला ने अमेरिकी राजदूत के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें झूठा बताया। स्थिति बिगड़ने पर महासभा के अध्यक्ष को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। फिदेल कास्त्रो की घड़ियों का भी किया जिक्र अपने भाषण के दौरान वॉल्ट्ज ने क्यूबा के पूर्व नेता फिदेल कास्त्रो की एक तस्वीर दिखाई, जिसमें वह दो रोलेक्स घड़ियां पहने नजर आ रहे थे। अमेरिकी राजदूत ने इन घड़ियों की कीमत को लेकर दावा किया और इसे क्यूबा के आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति से जोड़कर पेश किया। उन्होंने मौजूदा क्यूबाई नेतृत्व की जीवनशैली पर भी सवाल उठाए।

ये आरोप अमेरिकी प्रतिनिधि के संबोधन का हिस्सा थे। क्यूबा की ओर से अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर अलग पक्ष रखा गया और वॉशिंगटन की नीतियों की आलोचना की गई।

अमेरिकी प्रतिबंधों पर क्यों है विवाद? अमेरिका ने 1960 में क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने शुरू किए थे, जिन्हें 1962 में और व्यापक बनाया गया। वॉशिंगटन का कहना है कि प्रतिबंध क्यूबा में मानवाधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों के कारण जरूरी हैं। वहीं, क्यूबा की सरकार का आरोप है कि अमेरिकी प्रतिबंधों से उसकी अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और आम लोगों के जीवन पर गंभीर असर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में क्यूबा हर साल इन प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग वाला प्रस्ताव पेश करता है। यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इस पर होने वाला मतदान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रुख का संकेत देता है।

मतदान पर दुनिया की नजर इस वर्ष के मतदान से पहले अमेरिका ने सदस्य देशों से प्रस्ताव का समर्थन न करने की अपील की, जबकि क्यूबा ने प्रतिबंधों को आर्थिक संकट का प्रमुख कारण बताया। दोनों देशों के बीच यह टकराव केवल राजनयिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक और राजनीतिक विवाद को भी उजागर करता है।


Hashtags: #WorldInternational #Bhopal #संयुक्त #राष्ट्र #अमेरिका #क्यूबा #भिड़े #बैठक #स्थगित #संयुक्तराष्ट्रमेंअमेरिका