सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दुनिया में तबाही के पीछे समंदर? महंगाई और रोजगार पर बढ़ता संकट
दुनिया में बढ़ती महंगाई, रोजगार पर दबाव और आर्थिक अस्थिरता के पीछे कई कारण हैं, लेकिन समुद्र में हो रहे बदलाव भी अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का तापमान बढ़ रहा है, जलस्तर ऊपर उठ रहा है और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। इन बदलावों का असर केवल तटीय इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य आपूर्ति, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के जरिए दूर-दराज के देशों तक पहुंच सकता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्टें समुद्र की बिगड़ती सेहत और उससे जुड़े आर्थिक जोखिमों को रेखांकित करती हैं।
समुद्र का तापमान बढ़ने से मछलियों पर संकट समुद्री तापमान बढ़ने और समुद्री हीटवेव की घटनाएं बढ़ने से मछलियों के रहने, प्रजनन करने और भोजन तलाशने के क्षेत्र बदल सकते हैं। इससे पारंपरिक मछुआरों की पकड़ प्रभावित होती है और मछली पालन से जुड़े कारोबार को नुकसान पहुंच सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम प्रशांत क्षेत्र में 2025 के दौरान समुद्री हीटवेव ने समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और मत्स्य क्षेत्र को प्रभावित किया। जब मछली की उपलब्धता घटती है या आपूर्ति बाधित होती है, तो कुछ बाजारों में कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे उपभोक्ताओं पर खर्च का दबाव बढ़ता है और मछली पकड़ने, प्रसंस्करण, परिवहन तथा बिक्री से जुड़े लोगों की आमदनी प्रभावित हो सकती है।
महंगाई और वैश्विक व्यापार पर असर दुनिया का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से होने वाले व्यापार पर निर्भर है। समुद्र में तूफान, बाढ़ और अन्य चरम मौसमी घटनाएं बंदरगाहों, तटीय सड़कों तथा व्यापारिक ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसी स्थिति में माल की ढुलाई में देरी और परिवहन लागत बढ़ने का जोखिम रहता है। इसका असर कुछ वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, महंगाई केवल समुद्री बदलावों से नहीं बढ़ती; ऊर्जा की कीमतें, युद्ध, आपूर्ति शृंखला, मुद्रा विनिमय और सरकारी नीतियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
रोजगार पर क्यों मंडरा रहा खतरा? समुद्र से जुड़े उद्योगों में मछली पालन, समुद्री पर्यटन, बंदरगाह, जहाजरानी और तटीय सेवाएं शामिल हैं। समुद्र का जलस्तर बढ़ने, समुद्री जीवों की संख्या घटने और तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ने से इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संस्था (UNCTAD) के अनुसार, समुद्र आधारित अर्थव्यवस्था लगभग 10 करोड़ नौकरियों को सहारा देती है। ऐसे में समुद्री संसाधनों और तटीय ढांचे पर बढ़ता दबाव रोजगार तथा स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ा जोखिम है।
क्या समुद्र दुनिया की तबाही का कारण बन रहा है? समुद्र स्वयं तबाही का कारण नहीं, बल्कि पृथ्वी की जलवायु और जीवन को संतुलित रखने वाली महत्वपूर्ण प्राकृतिक व्यवस्था है। यह अतिरिक्त गर्मी और कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करता है। लेकिन लगातार बढ़ते तापमान, प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ने और समुद्री आवासों के विनाश से उसकी यह भूमिका दबाव में है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण, टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन और तटीय क्षेत्रों में बेहतर आपदा तैयारी से जोखिम कम किया जा सकता है। समुद्र की सुरक्षा अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा सवाल बन चुकी है।
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