सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: तेहरान। सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हुए हैं। इसी बीच इजरायली अखबार इजरायल हायोम की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब ने यमन के हूतियों को हमले रोकने और संघर्षविराम बनाए रखने के बदले 1 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, सऊदी अरब ने इस कथित पेशकश या भुगतान की पुष्टि नहीं की है।

तेहरान वार्ता में असीम मुनीर की मौजूदगी 26 अक्टूबर को ईरान की राजधानी तेहरान में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने ईरानी अधिकारियों के साथ बैठक की। सऊदी अरब की ओर से रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान की ओर से सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर और तुर्किये की ओर से खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन शामिल हुए।

वार्ता का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना, हूतियों के हमलों को रोकने के रास्ते तलाशना और अमेरिका-ईरान बातचीत सहित सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था। सऊदी विदेश मंत्रालय ने भी तेहरान यात्रा को तनाव कम करने, संवाद बढ़ाने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की कोशिश बताया।

क्या सऊदी अरब ने हूतियों को एक अरब डॉलर देने की पेशकश की? इजरायल हायोम की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित राशि का इस्तेमाल हूती-नियंत्रित इलाकों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और नागरिक बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए किया जा सकता है। बदले में हूतियों से सऊदी अरब पर हमले रोकने और संघर्षविराम बनाए रखने की अपेक्षा बताई गई है।

हालांकि, यह प्रस्ताव अभी स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुआ है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने तेहरान यात्रा की पुष्टि की, लेकिन एक अरब डॉलर की कथित पेशकश या किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की। सऊदी अरब के सामने सुरक्षा और तेल निर्यात की चुनौती सऊदी अरब के हवाई अड्डों और तेल प्रतिष्ठानों पर हूती हमलों ने उसकी सुरक्षा और ऊर्जा निर्यात को लेकर चिंता बढ़ाई है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव से खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस की आपूर्ति भी प्रभावित होने का खतरा है। ऐसे हालात में बातचीत के जरिए हमले रोकने की कोशिश सऊदी अरब के आर्थिक और रणनीतिक हितों से जुड़ी है। दूसरी ओर, ईरान की मध्यस्थता और पाकिस्तान की भागीदारी क्षेत्रीय कूटनीति में नए समीकरणों की ओर संकेत करती है। फिलहाल, असीम मुनीर की वार्ता में भागीदारी की खबरें हैं, लेकिन इसे हूतियों के सामने सैन्य आत्मसमर्पण कहना उपलब्ध तथ्यों से साबित नहीं होता। एक अरब डॉलर की कथित पेशकश और संघर्षविराम समझौते की स्थिति भी अभी स्पष्ट नहीं है।


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