सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: यरुशलम। इजरायल के 2026 संसदीय चुनाव के एग्जिट पोल ने राजनीतिक मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती दिख रही है, लेकिन उनके नेतृत्व वाले गठबंधन के सामने सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत जुटाने की चुनौती है। दूसरी ओर, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाला विपक्षी खेमा भी स्पष्ट बहुमत से दूर नजर आ रहा है। एग्जिट पोल में क्या है सीटों का गणित? इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। अलग-अलग टेलीविजन नेटवर्क के एग्जिट पोल में सीटों का अनुमान अलग-अलग रहा है।

कान 11 के अनुमान में नेतन्याहू के गठबंधन को 50 सीटें और विपक्षी खेमे को 53 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया। वहीं, चैनल 14 के एग्जिट पोल में नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन को 60 सीटों तक पहुंचते दिखाया गया, यानी बहुमत से एक सीट कम। इन अनुमानों में अंतर के कारण अंतिम परिणाम और गठबंधन की संभावनाओं पर नजर बनी हुई है।

विपक्ष को भी सरकार बनाने के लिए समर्थन की जरूरत लिकुड के सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद नेतन्याहू के लिए सरकार बनाना आसान नहीं दिख रहा। विपक्षी खेमे को भी बहुमत तक पहुंचने के लिए अन्य दलों का समर्थन जुटाना होगा। अरब बहुल दलों को एग्जिट पोल में कुल 17 से 18 सीटें मिलने का अनुमान है। ऐसे में सरकार गठन की बातचीत में इन दलों की भूमिका अहम हो सकती है, हालांकि प्रमुख राजनीतिक खेमों ने उनके साथ गठबंधन को लेकर आपत्तियां जताई हैं।

आधिकारिक नतीजों के बाद शुरू होगी सरकार गठन की प्रक्रिया एग्जिट पोल केवल शुरुआती अनुमान होते हैं। अंतिम तस्वीर मतगणना और आधिकारिक परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसके बाद राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग राजनीतिक दलों से बातचीत और सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। यदि कोई खेमा बहुमत जुटाने में सफल नहीं होता, तो देश में राजनीतिक गतिरोध और नए चुनाव की संभावना भी बनी रह सकती है।


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