सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे आर्यावर्ते…” के उल्लेख के साथ नागालैंड विश्वविद्यालय के चांसलर एवं वरिष्ठ पत्रकार समुद्र गुप्ता कश्यप ने दूरदर्शन की 67वीं वर्षगांठ के अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग में आयोजित विशेष व्याख्यान की शुरुआत की। भारत की सांस्कृतिक एकता और विविध भौगोलिक क्षेत्रों के बीच जुड़ाव की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों की अपनी भाषाएं, संस्कृतियां और जीवनशैलियां हैं, लेकिन इन विविधताओं के बावजूद हम सब एक ही भारत का हिस्सा हैं। कश्यप का संबोधन मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत और शेष भारत के बीच मौजूद दूरी को समझने और उसे कम करने पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग की विभागाध्यक्ष मोनिका वर्मा और एसोसिएट संजीव गुप्ता ने कश्यप का पुस्तक भेंट कर स्वागत किया। व्याख्यान में विभाग के शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कश्यप ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए पत्रकारिता में तथ्यपरकता, विश्वसनीयता, शोध और जमीनी रिपोर्टिंग के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर रिपोर्ट तैयार करने से पहले उसके तथ्यों की पुष्टि करने के साथ उसके सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ को समझना आवश्यक है।
उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में अपने पत्रकारिता अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी क्षेत्र की रिपोर्टिंग के लिए केवल घटनास्थल की जानकारी पर्याप्त नहीं है। पत्रकार को वहां की परिस्थितियों और लोगों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, शोध और सवाल पूछने की आदत विकसित करने की सलाह दी। संवाद सत्र के दौरान एमए बीजे तृतीय सेमेस्टर की विद्यार्थी तनुश्री गुप्ता ने सवाल किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और निजी समाचार चैनलों के बढ़ते प्रभाव के बीच दूरदर्शन को आज पहले की तुलना में कम देखा जा रहा है। ऐसे में वर्तमान समय में दूरदर्शन की प्रासंगिकता किस रूप में बनी हुई है। जवाब में कश्यप ने कहा कि दूरदर्शन की विश्वसनीयता कम नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि दूरदर्शन सरकार के अंतर्गत आता है, इसलिए उसके सामने कुछ विशेष जिम्मेदारियां भी हैं। उनके अनुसार जब दर्शकों को विश्वसनीय और तथ्यपरक समाचार की आवश्यकता होती है, तब दूरदर्शन आज भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि बदलते मीडिया परिदृश्य के बावजूद विश्वसनीय सूचना उपलब्ध कराने में दूरदर्शन की भूमिका बनी हुई है।
एमए बीजे तृतीय सेमेस्टर से ज्योति शुक्ला ने नॉर्थ ईस्ट और नॉर्थ इंडिया की मीडिया के बीच अंतर तथा पूर्वाेत्तर के लोगों के मुख्यधारा के मीडिया में कम प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि पूर्वाेत्तर भारत के लोग राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर अपेक्षाकृत कम दिखाई क्यों देते हैं और दोनों क्षेत्रों के मीडिया संस्थानों के कामकाज में क्या अंतर है। कश्यप ने इसके जवाब में नॉर्थ और नॉर्थ ईस्ट के बीच बने ‘माइंड ब्लॉक’ और दूरी को एक महत्वपूर्ण कारण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों के लोग एक-दूसरे को पर्याप्त रूप से समझ नहीं पाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नॉर्थ के लोगों से जब पूछा जाता है कि उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के राज्यों का दौरा किया है या नहीं, तो कई बार उनका जवाब होता है कि वह क्षेत्र बहुत दूर है। इसी तरह पूर्वोत्तर के लोगों में भी नॉर्थ इंडिया को लेकर एक दूरी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि स्थानीय और राज्य स्तरीय मीडिया संस्थान अपने स्तर पर काम कर रहे हैं, लेकिन दोनों क्षेत्रों के बीच संवाद और आपसी समझ को बढ़ाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार इस दूरी को कम करने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कश्यप ने विद्यार्थियों से कहा कि पत्रकारिता में तकनीकी दक्षता के साथ तथ्यों की समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति आवश्यक है। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने पत्रकारिता, मीडिया की विश्वसनीयता और पूर्वोत्तर के प्रतिनिधित्व से जुड़े अन्य प्रश्न भी पूछे, जिनका कश्यप ने अपने अनुभवों के आधार पर उत्तर दिया। इस अवसर पर एमएसी तृतीय सेमेस्टर, एमए बीजे तृतीय सेमेस्टर, बीएससी पांचवे सेमेस्टर के समस्त छात्र, छात्राएं उपस्थित रहे।
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