भोपाल । प्रदेश की शिवराज सरकार अब छह लाख 45 हजार टन गेहूं बेचेगी। यह गेहूं राज्य सरकार द्वारा दो साल पहले समर्थन मूल्य पर खरीदा था। इसके लिए 70 लाट बनाए गए हैं ताकि छोटे व्यापारी भी निविदा प्रक्रिया में हिस्सा ले सकें। पिछले बार एक-एक लाख टन के दो लाट बनाए गए थे, जिसकी वजह से छोटे व्यापारी दौड़ से बाहर हो गए थे। खरीदार के पास मंडी लायसेंस होना अनिवार्य रखा गया है। प्रति क्विंटल आधार दर 1590 रुपये रखी गई है। पिछली निविदा में यह दर प्रति क्विंटल 1580 रुपये रखी गई थी। यह गेहूं 1840 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया था। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 2019- 20 में प्रदेश सरकार ने 72 लाख टन से ज्यादा गेहूं की खरीद की थी। सेंट्रल पूल में केंद्र सरकार ने 66 लाख टन गेहूं ले लिया पर छह लाख 45 हजार टन गेहूं लेने से इन्कार कर दिया था।

इस गेहूं की खरीद में फंसी राशि को निकालने और गोदामों को खाली करने के लिए सरकार ने जून, 2021 में दो लाख टन गेहूं नीलाम करने की निविदा बुलाई थी। इसमें एक-एक लाख टन के दो लाट बनाए गए थे और सौ करोड़ रुपये का सालाना कारोबार करने वाली कंपनियों को ही भाग लेने की व्यवस्था बनाई थी। इस प्रविधान की वजह से प्रदेश के छोटे व्यापारी दौड़ से बाहर हो गए थे, जिसका विरोध भी हुआ था। निविदा में एक ही कंपनी आइटीसी सफल हुई थी। सिर्फ एक प्रस्ताव होने की वजह से मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति ने निविदा निरस्त करके फिर से प्रक्रिया करने का निर्णय लिया था। अब राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने वर्ष 2019- 20 के छह लाख 45 हजार टन गेहूं को बेचने के लिए निविदा जारी की हैं। होशंगाबाद और जबलपुर से एक-एक लाख टन गेहूं बेचा जाएगा। सेंट्रल पूल में केंद्र ने लेने से कर दिया था इन्कार केंद्र सरकार ने इस गेहूं को सेंट्रल पूल में लेने से इन्कार कर दिया था। दरअसल, तत्कालीन कमल नाथ सरकार ने जय किसान समृद्धि योजना के नाम से किसानों को प्रति क्विंटल 160 रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। केंद्र सरकार ने इसे अनुबंध का उल्लंघन मानते हुए छह लाख 45 हजार टन गेहूं लेने से मना कर दिया था।