सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : साल 2027 की शुरुआत में आसमान में एक बेहद खास खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। 6 फरवरी 2027 को वलयाकार सूर्य ग्रहण यानी Annular Solar Eclipse होगा, जिसमें सूर्य के सामने चंद्रमा इस तरह आएगा कि उसके चारों ओर चमकता हुआ रोशनी का घेरा दिखाई देगा। इसी वजह से इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी ‘आग का छल्ला’ कहा जाता है। NASA के अनुसार यह ग्रहण 2027 के दो सूर्य ग्रहणों में से पहला होगा।
वलयाकार सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा सूर्य के बीच वाले हिस्से को ढक लेता है, लेकिन उसका आकार सूर्य को पूरी तरह ढकने के लिए पर्याप्त बड़ा दिखाई नहीं देता। इसके परिणामस्वरूप सूर्य के चारों ओर चमकीला वलय नजर आता है। 6 फरवरी के ग्रहण के दौरान अधिकतम चरण करीब 7 मिनट 51 सेकंड तक रहेगा।
इस खगोलीय घटना का पूर्ण ‘रिंग ऑफ फायर’ रूप दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से देखा जा सकेगा। NASA के अनुसार वलयाकार ग्रहण का मार्ग चिली, अर्जेंटीना और अटलांटिक क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जबकि आंशिक ग्रहण दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और आसपास के क्षेत्रों में दिखाई देगा।
भारत से इस ग्रहण की वलयाकार अवस्था दिखाई नहीं देगी। इसलिए भारतीय दर्शकों को ‘रिंग ऑफ फायर’ देखने के लिए उस क्षेत्र की यात्रा करनी होगी जहां ग्रहण का मुख्य मार्ग होगा।
विशेषज्ञों की सलाह है कि सूर्य ग्रहण को कभी भी नंगी आंखों से सीधे नहीं देखना चाहिए। सुरक्षित सौर ग्रहण चश्मे या प्रमाणित सोलर फिल्टर का इस्तेमाल करना जरूरी है।
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