सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : वैज्ञानिकों ने आंखों की रोशनी बहाल करने की दिशा में एक नई उम्मीद जगाई है। शोधकर्ताओं ने ऐसी प्रकाश-सक्रिय दवाएं विकसित की हैं, जिन्होंने प्रयोगशाला में अंधे चूहों को दोबारा प्रकाश महसूस करने में मदद की। खास बात यह है कि इस प्रयोग में जीन थेरेपी, इलेक्ट्रॉनिक इम्प्लांट या विशेष रोशनी की जरूरत नहीं पड़ी।

शोधकर्ताओं ने इन दवाओं को Prosthe6 नाम दिया है। ये दवाएं रेटिना में मौजूद उन कोशिकाओं को सक्रिय करने का काम करती हैं, जो प्रकाश ग्रहण करने वाली फोटोरिसेप्टर कोशिकाओं के नष्ट होने के बाद भी बची रहती हैं। वैज्ञानिकों ने दवा को प्रकाश-सक्रिय बनाने की तकनीक विकसित की, जिससे बची हुई रेटिनल कोशिकाएं प्रकाश के संकेतों को आगे भेज सकें।

शोध में दो यौगिकों—Prosthe6-12 और Prosthe6-15—ने विशेष रूप से उत्साहजनक परिणाम दिखाए। इन्हें आंख में देने के साथ-साथ आई ड्रॉप्स के रूप में भी इस्तेमाल किया गया। उपचार के बाद अंधे चूहों ने प्रकाश और अंधेरे के बीच अंतर पहचानने से जुड़ा व्यवहार फिर दिखाया।

वैज्ञानिकों के अनुसार यह तकनीक भविष्य में रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा और उम्र से संबंधित मैक्युलर डिजीज जैसी दृष्टि संबंधी बीमारियों के लिए नई उपचार पद्धति का रास्ता खोल सकती है। हालांकि अभी यह शोध केवल पशुओं पर किया गया है और इसे इंसानों के लिए प्रमाणित इलाज नहीं माना जा सकता।

शोध के निष्कर्ष Journal of the American Chemical Society में प्रकाशित हुए हैं। अब वैज्ञानिक इस तकनीक की सुरक्षा, प्रभाव की अवधि और मानवों में संभावित उपयोग को लेकर आगे अध्ययन करेंगे।


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