सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हमारे शहरों का तेजी से हो रहा ऊर्ध्वाधर विस्तार हमारे जीवन के तरीके को पूरी तरह बदल रहा है। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि हम अपने आवासीय क्षेत्रों और पड़ोसों के निर्माण के तरीकों पर पुनर्विचार करें। "माइक्रो क्लाइमेटिक एनालिसिस ऑफ ओपन एनक्लोजर्स इन हाई-डेंसिटी बिल्ट एनवायरनमेंटः केस ऑफ हाई-डेंसिटी रेजिडेंशियल डेवलपमेंट इन ठाणे, महाराष्ट्र, इंडिया" शीर्षक से किए गए एक महत्वपूर्ण शोध ने अधिक ठंडे, आरामदायक और रहने योग्य शहरी वातावरण के निर्माण के लिए एक नई दिशा प्रदान की है। यह शोध वंदना श्रीवास्तव (तिवारी) में किया गया।
यह अध्ययन उस समस्या पर केंद्रित है जो आज भारतीय शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण लाखों लोगों को प्रभावित कर रही है। भूमि की कमी के कारण डेवलपर्स ऊँची-ऊँची इमारतों का निर्माण कर रहे हैं, जिससे अक्सर "अर्बन हीट आइलैंड" प्रभाव उत्पन्न होता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब प्राकृतिक हरियाली की जगह कंक्रीट और अन्य कृत्रिम सतहें ले लेती हैं, जो दिनभर सूर्य की गर्मी को अवशोषित करती.-हैं और रात में धीरे-धीरे उसे छोड़ती रहती हैं। परिणामस्वरूप, आवासीय परिसरों के खुले स्थान अत्यधिक गर्म और असुविधाजनक हो जाते हैं।
इस समस्या के समाधान की खोज के लिए शोधकर्ता ने दो स्तरों पर आधारित एक व्यावहारिक परीक्षण पद्धति अपनाई। प्रथम चरण में, मुंबई महानगरीय क्षेत्र के विभिन्न भागों में कई वर्षों के उपग्रह तापीय चित्रों का अध्ययन किया गया, ताकि विभिन्न एफएसआई परिदृश्यों के कारण भूमि सतह के तापमान में होने वाले परिवर्तनों को समझा जा सके। द्वितीय चरण में, ठाणे के तीन ऐसे आबासीय परिसरों का चयन किया गया जो वर्तमान शहरी विकास की सामान्य प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन परिसरों के केंद्रीय आँगनों में गर्मियों के सबसे गर्म दिनों के दौरान वास्तविक जलवायु सेंसर स्थापित कर वायु तापमान एवं आर्द्रता का प्रत्यक्ष मापन किया गया। इस क्षेत्रीय आँकड़ों के आधार पर अत्यंत सटीक त्रि-आयामी कंप्यूटर सिमुलेशन विकसित किए गए, जिनकी सहायता से भवनों की ऊँचाई, छाया, वायु प्रवाह और तापीय परिस्थितियों के परस्पर प्रभावों का विश्लेषण किया गया।
इस शोध का सबसे महत्वपूर्ण और आश्चर्यजनक निष्कर्ष यह है कि किसी भूखंड पर अधिक आवासीय इकाइयों का निर्माण अपने-आप में अधिक गर्मी पैदा नहीं करता। बास्तविक अंतर इस बात से पड़ता है कि भवनों की संरचना और व्यवस्था किस प्रकार की गई है। अध्ययन से सिद्ध हुआ कि केंद्रीय खुले स्थान के चारों ओर निर्मित ऊँची और पतली टावर-आकृति वाली इमारतें, पूरे भूभाग पर फैले हुए कम ऊँचाई वाले घने निर्माण की तुलना में अधिक ठंडी और आरामदायक होती हैं। ये ऊँची इमारतें विशाल सनस्क्रीन की तरह कार्य करती हैं और अपने द्वारा निर्मित छाया से दोपहर की तीव्र धूप को साझा खुले स्थानों तक पहुँचने से रोकती हैं। यद्यपि ये इमारतें प्राकृतिक वायु प्रवाह को कुछ हद तक बाधित करती हैं, फिर भी उनकी छाया से प्राप्त शीतलता गर्म एवं आई जलवायु में बाबु की कमी की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी सिद्ध होती है और दिन के समय निवासियों के लिए तापीय तनाव को उल्लेखनीय रूप से कम करती है।
इन निष्कर्षों को व्यवहार में लागू करना अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर ऐसे समय में जब वैश्विक तापमान निरंतर बढ़ रहा है। इसके लिए शहरी नियोजन प्राधिकरणों को यह अनिवार्य करना चाहिए कि किसी भी नए विकास परियोजना कोस्वीकृति प्रदान करने से पूर्व डेवलपर द्वारा विस्तृत माइक्रोक्लाइमेट सिमुलेशन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। यह सुनिश्चित करेगा कि परियोजना की रूपरेखा मानव तापीय आराम की रक्षा करती है।
इसके अतिरिक्त, नियामक प्रावधानों में स्काई व्यू फैक्टर (की न्यूनतम सीमा निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि भवनों के मध्य स्थित आँगनों में दिनभर संचित ऊष्मा का रात्रि में प्रभावी रूप से वायुमंडल में उत्सर्जन हो सकेा वर्तमान नगर नियोजन नियम मुख्यतः सड़क की चौड़ाई, अग्नि सुरक्षा और आर्थिक लाभ जैसे मानकों पर केंद्रित हैं, जबकि यह पूरी तरह उपेक्षित है कि किसी आवासीय परिसर की संरचना वहाँ रहने वाले लोगों के लिए कितनी आरामदायक होगी।
अध्ययन यह भी इंगित करता है कि यद्यपि ऊँची इमारतें दिन में अधिक शीतल वातावरण प्रदान करती हैं, किन्तु यदि स्काई व्यू फैक्टर अत्यधिक कम हो जाए तो रात्रि के समय गर्म हवा फैंस सकती है। इसलिए नियोजकों को ऐसे डिजाइन विकसित करने चाहिए जिनमें पर्याप्त दूरी, उचित अंतराल और वायु मार्ग उपलब्ध हों, जिससे संचित ऊष्मा रात के समय प्रभावी ढंग से बाहर निकल सके।
यदि नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को इस प्रकार के वैज्ञानिक एवं पूर्वानुमान आधारित उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ, तो वे किसी भी क्षेत्र के अत्यधिक गर्म होने की संभावना का आकलन निर्माण प्रारम्भ होने से पहले ही कर सकेंगे। इन वैज्ञानिक डिजाइन सिद्धांतों को अपनाना ही हमारे कंक्रीट के जंगलों को ऐसे सुरक्षित, स्वस्थ और रहने योग्य शहरी आश्रयों में परिवर्तित करने का मार्ग है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करें, ऊर्जा खपत और बिजली के खर्च को कम करें तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए टिकाऊ और आरामदायक समुदायों का निर्माण सुनिश्चित करें।
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