सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा की जिंदगी संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल मानी जाती है। छात्र जीवन में रंगभेद विरोधी गतिविधियों से जुड़े रामाफोसा को दो बार हिरासत में लिया गया। 1974 में उन्हें करीब 11 महीने तक एकांत हिरासत में रखा गया, जबकि 1976 में सोवेटो विद्रोह के बाद उन्हें करीब छह महीने तक हिरासत में रखा गया।
इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद रामाफोसा ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। उन्होंने पहले तत्कालीन यूनिवर्सिटी ऑफ द नॉर्थ में कानून की पढ़ाई शुरू की थी। हिरासत से रिहा होने के बाद उन्होंने जोहान्सबर्ग की एक लॉ फर्म में काम शुरू किया और साथ-साथ अपनी कानूनी पढ़ाई जारी रखी। बाद में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ अफ्रीका (UNISA) के माध्यम से अध्ययन पूरा किया और 1981 में B. Proc. की डिग्री हासिल की।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका करियर तेजी से आगे बढ़ा। 1982 में वे नेशनल यूनियन ऑफ माइनवर्कर्स के संस्थापक महासचिव बने और श्रमिक आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आगे चलकर वे ANC के महासचिव बने और दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद से लोकतंत्र की ओर संक्रमण की बातचीत में प्रमुख भूमिका निभाई।
आज रामाफोसा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति हैं। उनका जीवन बताता है कि कठिन परिस्थितियां लक्ष्य के रास्ते में बाधा जरूर बन सकती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से उन्हें पार किया जा सकता है।
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