सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सुनीता नारायण का बड़ा बयान, ‘यमुना मर चुकी है, अंतिम संस्कार बाकी’ नई दिल्ली: पर्यावरणविद् और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की महानिदेशक सुनीता नारायण ने यमुना नदी की खराब होती स्थिति और नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने यमुना की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि नदी लगभग “मर चुकी है” और अब उसके अंतिम संस्कार की स्थिति है।
यमुना की हालत पर जताई चिंतासुनीता नारायण लंबे समय से दिल्ली की यमुना में प्रदूषण, सीवेज और नदी के प्राकृतिक प्रवाह से जुड़े मुद्दे उठाती रही हैं। उनका कहना है कि केवल नदी की सफाई के लिए अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सीवेज प्रबंधन, नदी के प्रवाह और बाढ़ क्षेत्र की सुरक्षा पर भी गंभीरता से काम करना होगा।
यमुना में प्रदूषण का बड़ा कारण बिना पर्याप्त उपचार के सीवेज का नदी में पहुंचना माना जाता है। नदी के पुनर्जीवन के लिए प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ उसके पारिस्थितिक प्रवाह और बाढ़ क्षेत्र को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।नेपाल की त्रासदी को बताया बड़ी चेतावनीसुनीता नारायण ने नेपाल में हालिया विनाशकारी बाढ़ को भी पर्यावरणीय चेतावनी के तौर पर देखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हिमालय में दशकों से विकास और इंजीनियरिंग की ऐसी सोच अपनाई गई, जिसमें यह मान लिया गया कि नदियों और पहाड़ों को अपनी जरूरत के मुताबिक बदला जा सकता है। उनके अनुसार यही सोच आज बड़े पर्यावरणीय जोखिम पैदा कर रही है।नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर के ढहने के बाद बर्फ, चट्टानों और मलबे के साथ आई भीषण बाढ़ ने सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाई। हजारों घर प्रभावित हुए हैं और राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है।
हिमालय के लिए भी बढ़ता खतरा पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर, बर्फ और बारिश से जुड़े जोखिमों को नए सिरे से समझने की जरूरत है। नेपाल की त्रासदी ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि संवेदनशील पहाड़ी और नदी क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों की योजना बनाते समय बदलते जलवायु जोखिमों को कितना महत्व दिया जा रहा है।
सुनीता नारायण का संदेश केवल यमुना तक सीमित नहीं है। उनके बयान में नदियों, पहाड़ों और पूरे पारिस्थितिक तंत्र के साथ विकास की मौजूदा नीति पर पुनर्विचार की जरूरत को रेखांकित किया गया है।
Hashtags: #EnvironmentAgriculture #Bhopal #Desksource #एनएन #टवर #आईट #DeskSource #वरणव #एनव #यरनम