सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : Gen-Z को नौकरी के लिए अनफिट मान रही हैं कंपनियां? नए ग्रेजुएट्स की स्किल्स पर उठे सवाल
नई दिल्ली। Gen-Z के नौकरी बाजार में प्रवेश के साथ कंपनियों और युवाओं के बीच अपेक्षाओं का अंतर चर्चा का विषय बन गया है। हालिया रिपोर्टों और सर्वेक्षणों में कुछ नियोक्ताओं ने नए ग्रेजुएट्स की कम्युनिकेशन, प्रोफेशनल व्यवहार, क्रिटिकल थिंकिंग और कार्यस्थल की बुनियादी समझ को लेकर चिंता जताई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या कॉलेज से निकलने वाले युवा आधुनिक कॉरपोरेट दुनिया की जरूरतों के लिए पर्याप्त रूप से तैयार हैं।
सिर्फ डिग्री काफी नहीं
आज कंपनियां केवल शैक्षणिक डिग्री या तकनीकी ज्ञान को पर्याप्त नहीं मान रही हैं। टीम में काम करने, स्पष्ट तरीके से संवाद करने, समस्या का समाधान खोजने, समय पर काम पूरा करने और प्रोफेशनल माहौल को समझने जैसी क्षमताएं भी भर्ती में महत्वपूर्ण होती जा रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, Gen-Z की तकनीक और AI को अपनाने की क्षमता मजबूत है, लेकिन कुछ युवाओं में पारंपरिक कार्यस्थल से जुड़ी सॉफ्ट स्किल्स और व्यावहारिक अनुभव की कमी दिखाई देती है।
AI में Gen-Z आगे
दूसरी ओर, Gen-Z को पूरी तरह ‘अनफिट’ कहना भी सही तस्वीर नहीं दिखाता। Deloitte India के 2026 सर्वे के अनुसार, भारत में 93% Gen-Z कर्मचारी अपने रोजमर्रा के काम में AI का इस्तेमाल करते हैं। 90% से अधिक Gen-Z और मिलेनियल्स का कहना है कि AI उनके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
इससे साफ है कि नई पीढ़ी के पास तकनीकी बदलावों के साथ तेजी से तालमेल बैठाने की क्षमता है। चुनौती यह है कि AI और डिजिटल दक्षता के साथ कम्युनिकेशन, नेतृत्व, निर्णय लेने और प्रोफेशनल व्यवहार जैसी क्षमताओं को भी मजबूत किया जाए।
कंपनियों और कॉलेजों दोनों की जिम्मेदारी
नए ग्रेजुएट्स की तैयारी को लेकर सवाल सिर्फ युवाओं की क्षमता तक सीमित नहीं हैं। कंपनियों से भी अपेक्षा की जाती है कि वे शुरुआती कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण, मेंटरशिप और वास्तविक काम का अनुभव दें। वहीं कॉलेजों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट और इंडस्ट्री-आधारित प्रशिक्षण पर अधिक जोर देना होगा।
भारत में भी Gen-Z के सामने रोजगार की चुनौती गंभीर है। उपलब्ध श्रम आंकड़ों के विश्लेषण में युवा ग्रेजुएट्स के बीच बेरोजगारी और शिक्षा तथा रोजगार बाजार की जरूरतों के बीच कौशल-अंतर को महत्वपूर्ण समस्या बताया गया है।
‘अनफिट’ नहीं, बदलती जरूरतों के बीच नई पीढ़ी
दरअसल, Gen-Z को पूरी तरह नौकरी के लिए अनुपयुक्त कहना शायद समस्या को बहुत सरल बना देना होगा। नई पीढ़ी तकनीक, AI और डिजिटल टूल्स में मजबूत है, जबकि कंपनियां उनसे पारंपरिक प्रोफेशनल स्किल्स की भी उम्मीद कर रही हैं।
ऐसे में समाधान युवाओं को दोष देने के बजाय शिक्षा संस्थानों, कंपनियों और युवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने में है। आने वाले वर्षों में वही उम्मीदवार अधिक सफल हो सकते हैं जो AI और तकनीकी कौशल के साथ कम्युनिकेशन, क्रिटिकल थिंकिंग, टीमवर्क और प्रोफेशनलिज्म को भी मजबूत करेंगे।
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