सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रील्स से गोरखपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन परेशान, 24 घंटे में बदला फैसला; जानें पूरा मामलागोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रों के रील और वीडियो बनाने को लेकर जारी आदेश ने महज 24 घंटे के भीतर नया मोड़ ले लिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले परिसर में बिना अनुमति रील, वीडियो या अन्य डिजिटल कंटेंट बनाने और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। लेकिन अगले ही दिन प्रशासन ने नया आदेश जारी कर छात्रों को रील और वीडियो बनाने की अनुमति दे दी।

पहले जारी हुआ था सख्त आदेशरविवार को विश्वविद्यालय के नियंता की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि विद्यार्थी परिसर में बिना अनुमति रील, वीडियो या अन्य डिजिटल कंटेंट तैयार कर सोशल मीडिया पर अपलोड नहीं कर सकेंगे। यदि किसी छात्र को वीडियो बनाना है, तो उसे पहले विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।

इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय परिसर में इसकी चर्चा शुरू हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ शिक्षकों की ओर से भी इस फैसले पर नाराजगी जताई गई।24 घंटे में क्यों बदला फैसला?

सोमवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने नया आदेश जारी कर पहले के फैसले में बदलाव कर दिया। नए आदेश में कहा गया कि विद्यार्थियों को रील और वीडियो के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलना चाहिए। विश्वविद्यालय ने क्रिएटिविटी और ऑरेंज इकोनॉमी को बढ़ावा देने की जरूरत का भी उल्लेख किया।प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य छात्रों की रचनात्मकता पर रोक लगाना नहीं था। हालांकि, रील और डिजिटल कंटेंट बनाते समय अनुशासन, भाषा, प्रस्तुति और सामाजिक जिम्मेदारी का ध्यान रखना जरूरी होगा।

फिर रील बनाने पर क्या रहेगा नियम?नए आदेश के बाद छात्रों को रील और वीडियो बनाने की अनुमति है, लेकिन विश्वविद्यालय परिसर की गरिमा और दूसरे लोगों की निजता का ध्यान रखना होगा। बिना सहमति किसी व्यक्ति की रिकॉर्डिंग करना, कक्षाओं में पढ़ाई बाधित करना या विश्वविद्यालय की गतिविधियों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने वाला कंटेंट तैयार करना परेशानी का कारण बन सकता है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि सोशल मीडिया पर डाला गया कोई भी वीडियो तेजी से परिसर से बाहर पहुंच सकता है। इसलिए विद्यार्थियों की रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी और अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी है।

छात्रों को मिला क्रिएटिविटी का मौकानए फैसले के बाद छात्रों को अपनी प्रतिभा सोशल मीडिया के जरिए प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। विश्वविद्यालय का रुख अब पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय जिम्मेदार डिजिटल कंटेंट को बढ़ावा देने का नजर आ रहा है।इस पूरे घटनाक्रम ने यह बहस भी शुरू कर दी है कि शैक्षणिक संस्थानों में सोशल मीडिया और छात्रों की रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाए।


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